18 जून 2009 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 18 जून 2009, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 18 जून 2009 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (15:04 तक), नक्षत्र रेवती (09:15 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:23 पर और सूर्यास्त 19:21 पर है। राहुकाल 14:07 से 15:51 तक है।

दिन और रात
दिन 05:23 – 19:21
रात 05:23 तक
तिथि
दशमी, 15:04 तक
एकादशी
नक्षत्र
रेवती, 09:15 तक
अश्विनी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 जून 2009 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण दशमी 15:04 तक
कृष्ण एकादशी 13:24, 19 जून तक
नक्षत्र
रेवती 09:15 तक
अश्विनी 08:31, 19 जून तक
योग
शोभन 15:12 तक
अतिगंडअशुभ 12:49, 19 जून तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:04 तक
बव 02:20, 19 जून तक
बालव 13:24, 19 जून तक
चंद्र राशि
मीन 09:15 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:23
सूर्यास्त
19:21
चंद्रोदय
01:13
चंद्रास्त
14:40
दिनमान
13h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2066
शक संवत
1931, विरोधी संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:03 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:50

अशुभ समय

राहुकाल
14:07 – 15:51
यमगंड
05:23 – 07:08
गुलिक काल
08:52 – 10:37

18 जून 2009 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:23 – 07:08शुभ
रोग07:08 – 08:52टालें
उद्वेग08:52 – 10:37टालें
चर10:37 – 12:22सामान्य
लाभ12:22 – 14:07शुभ
अमृत14:07 – 15:51शुभ
काल15:51 – 17:36टालें
शुभ17:36 – 19:21शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:21 – 20:36शुभ
चर20:36 – 21:51सामान्य
रोग21:51 – 23:07टालें
काल23:07 – 00:22टालें
लाभ00:22 – 01:37शुभ
उद्वेग01:37 – 02:52टालें
शुभ02:52 – 04:08शुभ
अमृत04:08 – 05:23शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:2306:33दिन
मंगल06:3307:42दिन
सूर्य07:4208:52दिन
शुक्र08:5210:02दिन
बुध10:0211:12दिन
चंद्र11:1212:22दिन
शनि12:2213:32दिन
गुरु13:3214:41दिन
मंगल14:4115:51दिन
सूर्य15:5117:01दिन
शुक्र17:0118:11दिन
बुध18:1119:21दिन
चंद्र19:2120:11रात
शनि20:1121:01रात
गुरु21:0121:51रात
मंगल21:5122:41रात
सूर्य22:4123:32रात
शुक्र23:3200:22रात
बुध00:2201:12रात
चंद्र01:1202:02रात
शनि02:0202:52रात
गुरु02:5203:43रात
मंगल03:4304:33रात
सूर्य04:3305:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 जून 2009कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 जून 2009प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जून 2009आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
26 जून 2009विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 जुल॰ 2009शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 जुल॰ 2009प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 जुल॰ 2009आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
11 जुल॰ 2009संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जुल॰ 2009कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 जुल॰ 2009कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9892° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।