22 जून 2009 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 22 जून 2009, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 22 जून 2009 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (01:04, 23 जून तक), नक्षत्र मृगशिरा (23:44 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 05:24 पर और सूर्यास्त 19:22 पर है। राहुकाल 07:08 से 08:53 तक है।

दिन और रात
दिन 05:24 – 19:22
रात 05:24 तक
तिथि
अमावस्या, 01:04 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
मृगशिरा, 23:44 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 जून 2009 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
अमावस्या 01:04, 23 जून तक
शुक्ल प्रतिपदा 21:22, 23 जून तक
नक्षत्र
आर्द्रा 20:52, 23 जून तक
योग
गंडअशुभ 22:33 तक
वृद्धि 18:26, 23 जून तक
करण
चतुष्पद 14:54 तक
नाग 01:04, 23 जून तक
किंस्तुघ्न 11:13, 23 जून तक
चंद्र राशि
वृषभ 13:09 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:24
सूर्यास्त
19:22
चंद्रोदय
04:26
चंद्रास्त
19:09
दिनमान
13h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2066
शक संवत
1931, विरोधी संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:03 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
07:08 – 08:53
यमगंड
10:38 – 12:23
गुलिक काल
14:07 – 15:52

22 जून 2009 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:24 – 07:08शुभ
काल07:08 – 08:53टालें
शुभ08:53 – 10:38शुभ
रोग10:38 – 12:23टालें
उद्वेग12:23 – 14:07टालें
चर14:07 – 15:52सामान्य
लाभ15:52 – 17:37शुभ
अमृत17:37 – 19:22शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:22 – 20:37सामान्य
रोग20:37 – 21:52टालें
काल21:52 – 23:07टालें
लाभ23:07 – 00:23शुभ
उद्वेग00:23 – 01:38टालें
शुभ01:38 – 02:53शुभ
अमृत02:53 – 04:09शुभ
चर04:09 – 05:24सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2406:33दिन
शनि06:3307:43दिन
गुरु07:4308:53दिन
मंगल08:5310:03दिन
सूर्य10:0311:13दिन
शुक्र11:1312:23दिन
बुध12:2313:32दिन
चंद्र13:3214:42दिन
शनि14:4215:52दिन
गुरु15:5217:02दिन
मंगल17:0218:12दिन
सूर्य18:1219:22दिन
शुक्र19:2220:12रात
बुध20:1221:02रात
चंद्र21:0221:52रात
शनि21:5222:42रात
गुरु22:4223:33रात
मंगल23:3300:23रात
सूर्य00:2301:13रात
शुक्र01:1302:03रात
बुध02:0302:53रात
चंद्र02:5303:43रात
शनि03:4304:34रात
गुरु04:3405:24रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जून 2009आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
26 जून 2009विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 जुल॰ 2009शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 जुल॰ 2009प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 जुल॰ 2009आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
11 जुल॰ 2009संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जुल॰ 2009कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 जुल॰ 2009कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2009कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जुल॰ 2009प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9894° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।