31 अक्टूबर 2009 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 31 अक्टूबर 2009, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 31 अक्टूबर 2009 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (02:28, 1 नव॰ तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (19:17 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:32 पर और सूर्यास्त 17:36 पर है। राहुकाल 09:18 से 10:41 तक है।

दिन और रात
दिन 06:32 – 17:36
रात 06:33 तक
तिथि
त्रयोदशी, 02:28 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 19:17 तक
रेवती
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 अक्टूबर 2009 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 02:28, 1 नव॰ तक
शुक्ल चतुर्दशी 01:53, 2 नव॰ तक
नक्षत्र
रेवती 19:31, 1 नव॰ तक
योग
हर्षण 05:02, 1 नव॰ तक
वज्रअशुभ 03:22, 2 नव॰ तक
करण
कौलव 14:31 तक
तैतिल 02:28, 1 नव॰ तक
गर 14:15, 1 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:32
सूर्यास्त
17:36
चंद्रोदय
15:49
चंद्रास्त
03:55
दिनमान
11h 5m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2066
शक संवत
1931, विरोधी संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:49 – 05:40
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:26

अशुभ समय

राहुकाल
09:18 – 10:41
यमगंड
13:27 – 14:50
गुलिक काल
06:32 – 07:55

31 अक्टूबर 2009 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:32 – 07:55टालें
शुभ07:55 – 09:18शुभ
रोग09:18 – 10:41टालें
उद्वेग10:41 – 12:04टालें
चर12:04 – 13:27सामान्य
लाभ13:27 – 14:50शुभ
अमृत14:50 – 16:13शुभ
काल16:13 – 17:36टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:36 – 19:13शुभ
उद्वेग19:13 – 20:50टालें
शुभ20:50 – 22:27शुभ
अमृत22:27 – 00:04शुभ
चर00:04 – 01:42सामान्य
रोग01:42 – 03:19टालें
काल03:19 – 04:56टालें
लाभ04:56 – 06:33शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3207:27दिन
गुरु07:2708:23दिन
मंगल08:2309:18दिन
सूर्य09:1810:13दिन
शुक्र10:1311:09दिन
बुध11:0912:04दिन
चंद्र12:0413:00दिन
शनि13:0013:55दिन
गुरु13:5514:50दिन
मंगल14:5015:46दिन
सूर्य15:4616:41दिन
शुक्र16:4117:36दिन
बुध17:3618:41रात
चंद्र18:4119:46रात
शनि19:4620:50रात
गुरु20:5021:55रात
मंगल21:5523:00रात
सूर्य23:0000:04रात
शुक्र00:0401:09रात
बुध01:0902:14रात
चंद्र02:1403:19रात
शनि03:1904:23रात
गुरु04:2305:28रात
मंगल05:2806:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 अक्टू॰ 2009प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2009कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2009संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 नव॰ 2009कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 नव॰ 2009कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 नव॰ 2009प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2009मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2009वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2009विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 नव॰ 2009शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9944° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।