2 फ़रवरी 2011 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 2 फ़रवरी 2011, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 2 फ़रवरी 2011 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (08:00, 3 फ़र॰ तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (12:39 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 07:09 पर और सूर्यास्त 18:00 पर है। राहुकाल 12:34 से 13:56 तक है।

दिन और रात
दिन 07:09 – 18:00
रात 07:08 तक
तिथि
अमावस्या
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 12:39 तक
श्रवण
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 फ़रवरी 2011 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
अमावस्या 08:00, 3 फ़र॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 14:48, 3 फ़र॰ तक
योग
सिद्धि 20:21 तक
व्यतीपातअशुभ 20:34, 3 फ़र॰ तक
करण
चतुष्पद 19:10 तक
नाग 08:00, 3 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:09
सूर्यास्त
18:00
चंद्रोदय
06:23
चंद्रास्त
17:28
दिनमान
10h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2067
शक संवत
1932, विकृति संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:23 – 06:16
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 12:56 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:34 – 13:56
यमगंड
08:30 – 09:51
गुलिक काल
11:13 – 12:34

2 फ़रवरी 2011 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:09 – 08:30शुभ
अमृत08:30 – 09:51शुभ
काल09:51 – 11:13टालें
शुभ11:13 – 12:34शुभ
रोग12:34 – 13:56टालें
उद्वेग13:56 – 15:17टालें
चर15:17 – 16:39सामान्य
लाभ16:39 – 18:00शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:00 – 19:39टालें
शुभ19:39 – 21:17शुभ
अमृत21:17 – 22:56शुभ
चर22:56 – 00:34सामान्य
रोग00:34 – 02:13टालें
काल02:13 – 03:51टालें
लाभ03:51 – 05:30शुभ
उद्वेग05:30 – 07:08टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:0908:03दिन
चंद्र08:0308:57दिन
शनि08:5709:51दिन
गुरु09:5110:46दिन
मंगल10:4611:40दिन
सूर्य11:4012:34दिन
शुक्र12:3413:29दिन
बुध13:2914:23दिन
चंद्र14:2315:17दिन
शनि15:1716:12दिन
गुरु16:1217:06दिन
मंगल17:0618:00दिन
सूर्य18:0019:06रात
शुक्र19:0620:12रात
बुध20:1221:17रात
चंद्र21:1722:23रात
शनि22:2323:29रात
गुरु23:2900:34रात
मंगल00:3401:40रात
सूर्य01:4002:45रात
शुक्र02:4503:51रात
बुध03:5104:57रात
चंद्र04:5706:02रात
शनि06:0207:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 फ़र॰ 2011माघ अमावस्याअमावस्या
7 फ़र॰ 2011विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2011कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2011शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 फ़र॰ 2011प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
18 फ़र॰ 2011माघ पूर्णिमापूर्णिमा
21 फ़र॰ 2011संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 फ़र॰ 2011कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 फ़र॰ 2011कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 मार्च 2011प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0119° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।