2 नवंबर 2011 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 2 नवंबर 2011, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 2 नवंबर 2011 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (09:55 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (11:06 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:33 पर और सूर्यास्त 17:35 पर है। राहुकाल 12:04 से 13:27 तक है।

दिन और रात
दिन 06:33 – 17:35
रात 06:34 तक
तिथि
सप्तमी, 09:55 तक
अष्टमी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 11:06 तक
श्रवण
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 नवंबर 2011 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 09:55 तक
शुक्ल अष्टमी 10:31, 3 नव॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 12:18, 3 नव॰ तक
योग
शूलअशुभ 19:03 तक
गंडअशुभ 18:35, 3 नव॰ तक
करण
वणिज 09:55 तक
विष्टि (भद्रा) 22:08 तक
बव 10:31, 3 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:33
सूर्यास्त
17:35
चंद्रोदय
12:35
चंद्रास्त
23:52
दिनमान
11h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2068
शक संवत
1933, खर संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:49 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:26 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:04 – 13:27
यमगंड
07:56 – 09:18
गुलिक काल
10:41 – 12:04

2 नवंबर 2011 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:33 – 07:56शुभ
अमृत07:56 – 09:18शुभ
काल09:18 – 10:41टालें
शुभ10:41 – 12:04शुभ
रोग12:04 – 13:27टालें
उद्वेग13:27 – 14:50टालें
चर14:50 – 16:12सामान्य
लाभ16:12 – 17:35शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:35 – 19:13टालें
शुभ19:13 – 20:50शुभ
अमृत20:50 – 22:27शुभ
चर22:27 – 00:04सामान्य
रोग00:04 – 01:42टालें
काल01:42 – 03:19टालें
लाभ03:19 – 04:56शुभ
उद्वेग04:56 – 06:34टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3307:28दिन
चंद्र07:2808:23दिन
शनि08:2309:18दिन
गुरु09:1810:14दिन
मंगल10:1411:09दिन
सूर्य11:0912:04दिन
शुक्र12:0412:59दिन
बुध12:5913:54दिन
चंद्र13:5414:50दिन
शनि14:5015:45दिन
गुरु15:4516:40दिन
मंगल16:4017:35दिन
सूर्य17:3518:40रात
शुक्र18:4019:45रात
बुध19:4520:50रात
चंद्र20:5021:55रात
शनि21:5523:00रात
गुरु23:0000:04रात
मंगल00:0401:09रात
सूर्य01:0902:14रात
शुक्र02:1403:19रात
बुध03:1904:24रात
चंद्र04:2405:29रात
शनि05:2906:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 नव॰ 2011शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 नव॰ 2011प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 नव॰ 2011कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
15 नव॰ 2011संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 नव॰ 2011वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नव॰ 2011कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 नव॰ 2011कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 नव॰ 2011प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 नव॰ 2011मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
28 नव॰ 2011विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0224° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।