17 जून 2012 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 17 जून 2012, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 17 जून 2012 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (16:15 तक), नक्षत्र कृत्तिका (19:04 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:23 पर और सूर्यास्त 19:21 पर है। राहुकाल 17:36 से 19:21 तक है।

दिन और रात
दिन 05:23 – 19:21
रात 05:23 तक
तिथि
त्रयोदशी, 16:15 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 19:04 तक
रोहिणी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 जून 2012 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 16:15 तक
कृष्ण चतुर्दशी 18:33, 18 जून तक
नक्षत्र
रोहिणी 21:55, 18 जून तक
योग
धृति 02:27, 18 जून तक
शूलअशुभ 03:15, 19 जून तक
करण
वणिज 16:15 तक
विष्टि (भद्रा) 05:26, 18 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:23
सूर्यास्त
19:21
चंद्रोदय
03:28
चंद्रास्त
17:29
दिनमान
13h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:50

अशुभ समय

राहुकाल
17:36 – 19:21
यमगंड
12:22 – 14:06
गुलिक काल
15:51 – 17:36

17 जून 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:23 – 07:07टालें
चर07:07 – 08:52सामान्य
लाभ08:52 – 10:37शुभ
अमृत10:37 – 12:22शुभ
काल12:22 – 14:06टालें
शुभ14:06 – 15:51शुभ
रोग15:51 – 17:36टालें
उद्वेग17:36 – 19:21टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:21 – 20:36शुभ
अमृत20:36 – 21:51शुभ
चर21:51 – 23:06सामान्य
रोग23:06 – 00:22टालें
काल00:22 – 01:37टालें
लाभ01:37 – 02:52शुभ
उद्वेग02:52 – 04:08टालें
शुभ04:08 – 05:23शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2306:33दिन
शुक्र06:3307:42दिन
बुध07:4208:52दिन
चंद्र08:5210:02दिन
शनि10:0211:12दिन
गुरु11:1212:22दिन
मंगल12:2213:31दिन
सूर्य13:3114:41दिन
शुक्र14:4115:51दिन
बुध15:5117:01दिन
चंद्र17:0118:11दिन
शनि18:1119:21दिन
गुरु19:2120:11रात
मंगल20:1121:01रात
सूर्य21:0121:51रात
शुक्र21:5122:41रात
बुध22:4123:32रात
चंद्र23:3200:22रात
शनि00:2201:12रात
गुरु01:1202:02रात
मंगल02:0202:52रात
सूर्य02:5203:43रात
शुक्र03:4304:33रात
बुध04:3305:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 जून 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 जून 2012आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
23 जून 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 जून 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
2 जुल॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जुल॰ 2012आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
7 जुल॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 जुल॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जुल॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 जुल॰ 2012कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0311° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।