14 जुलाई 2012 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 14 जुलाई 2012, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 14 जुलाई 2012 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (03:46, 15 जुल॰ तक), नक्षत्र कृत्तिका (02:07, 15 जुल॰ तक) और योग शूल है। सूर्योदय 05:32 पर और सूर्यास्त 19:21 पर है। राहुकाल 08:59 से 10:43 तक है।

दिन और रात
दिन 05:32 – 19:21
रात 05:33 तक
तिथि
एकादशी, 03:46 तक
द्वादशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 02:07 तक
रोहिणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 जुलाई 2012 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 03:46, 15 जुल॰ तक
कृष्ण द्वादशी 06:00, 16 जुल॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 02:07, 15 जुल॰ तक
रोहिणी 04:57, 16 जुल॰ तक
योग
शूलअशुभ 09:41 तक
गंडअशुभ 10:42, 15 जुल॰ तक
करण
बव 14:32 तक
बालव 03:46, 15 जुल॰ तक
कौलव 16:56, 15 जुल॰ तक
चंद्र राशि
मेष 05:49 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:32
सूर्यास्त
19:21
चंद्रोदय
01:25
चंद्रास्त
15:22
दिनमान
13h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:11 – 04:52
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
08:59 – 10:43
यमगंड
14:10 – 15:53
गुलिक काल
05:32 – 07:16

14 जुलाई 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:32 – 07:16टालें
शुभ07:16 – 08:59शुभ
रोग08:59 – 10:43टालें
उद्वेग10:43 – 12:26टालें
चर12:26 – 14:10सामान्य
लाभ14:10 – 15:53शुभ
अमृत15:53 – 17:37शुभ
काल17:37 – 19:21टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:21 – 20:37शुभ
उद्वेग20:37 – 21:54टालें
शुभ21:54 – 23:10शुभ
अमृत23:10 – 00:27शुभ
चर00:27 – 01:43सामान्य
रोग01:43 – 03:00टालें
काल03:00 – 04:16टालें
लाभ04:16 – 05:33शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:3206:41दिन
गुरु06:4107:50दिन
मंगल07:5008:59दिन
सूर्य08:5910:08दिन
शुक्र10:0811:17दिन
बुध11:1712:26दिन
चंद्र12:2613:35दिन
शनि13:3514:44दिन
गुरु14:4415:53दिन
मंगल15:5317:02दिन
सूर्य17:0218:12दिन
शुक्र18:1219:21दिन
बुध19:2120:12रात
चंद्र20:1221:03रात
शनि21:0321:54रात
गुरु21:5422:45रात
मंगल22:4523:36रात
सूर्य23:3600:27रात
शुक्र00:2701:18रात
बुध01:1802:09रात
चंद्र02:0903:00रात
शनि03:0003:51रात
गुरु03:5104:42रात
मंगल04:4205:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जुल॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 जुल॰ 2012कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
17 जुल॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 जुल॰ 2012श्रावण अमावस्याअमावस्या
23 जुल॰ 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जुल॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जुल॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 अग॰ 2012श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
6 अग॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अग॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0321° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।