14 सितंबर 2012 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 14 सितंबर 2012, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 14 सितंबर 2012 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (11:09 तक), नक्षत्र मघा (03:52, 15 सित॰ तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:05 पर और सूर्यास्त 18:27 पर है। राहुकाल 10:43 से 12:16 तक है।

दिन और रात
दिन 06:05 – 18:27
रात 06:06 तक
तिथि
त्रयोदशी, 11:09 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
मघा, 03:52 तक
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 सितंबर 2012 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 11:09 तक
कृष्ण चतुर्दशी 09:40, 15 सित॰ तक
नक्षत्र
मघा 03:52, 15 सित॰ तक
पूर्वा फाल्गुनी 02:44, 16 सित॰ तक
योग
सिद्ध 00:58, 15 सित॰ तक
साध्य 22:24, 15 सित॰ तक
करण
वणिज 11:09 तक
विष्टि (भद्रा) 22:29 तक
शकुनि 09:40, 15 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:05
सूर्यास्त
18:27
चंद्रोदय
04:07
चंद्रास्त
17:04
दिनमान
12h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
अधिक भाद्रपद
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:32 – 05:19
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:41

अशुभ समय

राहुकाल
10:43 – 12:16
यमगंड
15:21 – 16:54
गुलिक काल
07:38 – 09:11

14 सितंबर 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:05 – 07:38सामान्य
लाभ07:38 – 09:11शुभ
अमृत09:11 – 10:43शुभ
काल10:43 – 12:16टालें
शुभ12:16 – 13:49शुभ
रोग13:49 – 15:21टालें
उद्वेग15:21 – 16:54टालें
चर16:54 – 18:27सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:27 – 19:54टालें
काल19:54 – 21:21टालें
लाभ21:21 – 22:49शुभ
उद्वेग22:49 – 00:16टालें
शुभ00:16 – 01:44शुभ
अमृत01:44 – 03:11शुभ
चर03:11 – 04:38सामान्य
रोग04:38 – 06:06टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:0507:07दिन
बुध07:0708:09दिन
चंद्र08:0909:11दिन
शनि09:1110:12दिन
गुरु10:1211:14दिन
मंगल11:1412:16दिन
सूर्य12:1613:18दिन
शुक्र13:1814:20दिन
बुध14:2015:21दिन
चंद्र15:2116:23दिन
शनि16:2317:25दिन
गुरु17:2518:27दिन
मंगल18:2719:25रात
सूर्य19:2520:23रात
शुक्र20:2321:21रात
बुध21:2122:20रात
चंद्र22:2023:18रात
शनि23:1800:16रात
गुरु00:1601:14रात
मंगल01:1402:13रात
सूर्य02:1303:11रात
शुक्र03:1104:09रात
बुध04:0905:07रात
चंद्र05:0706:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 सित॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 सित॰ 2012अधिक भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
16 सित॰ 2012कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 सित॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 सित॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 सित॰ 2012भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
4 अक्टू॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 अक्टू॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 अक्टू॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 अक्टू॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0345° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।