30 अक्टूबर 2014 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 30 अक्टूबर 2014, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 30 अक्टूबर 2014 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (21:19 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (02:17, 31 अक्टू॰ तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:31 पर और सूर्यास्त 17:37 पर है। राहुकाल 13:27 से 14:51 तक है।

दिन और रात
दिन 06:31 – 17:37
रात 06:32 तक
तिथि
सप्तमी, 21:19 तक
अष्टमी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 02:17 तक
श्रवण
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 अक्टूबर 2014 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 21:19 तक
शुक्ल अष्टमी 19:14, 31 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 02:17, 31 अक्टू॰ तक
श्रवण 00:53, 1 नव॰ तक
योग
धृति 15:45 तक
शूलअशुभ 12:56, 31 अक्टू॰ तक
करण
गर 10:16 तक
वणिज 21:19 तक
विष्टि (भद्रा) 08:18, 31 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
धनु 09:13 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:31
सूर्यास्त
17:37
चंद्रोदय
12:10
चंद्रास्त
23:25
दिनमान
11h 6m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2071
शक संवत
1936, जय संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:48 – 05:39
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:26

अशुभ समय

राहुकाल
13:27 – 14:51
यमगंड
06:31 – 07:54
गुलिक काल
09:18 – 10:41

30 अक्टूबर 2014 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:31 – 07:54शुभ
रोग07:54 – 09:18टालें
उद्वेग09:18 – 10:41टालें
चर10:41 – 12:04सामान्य
लाभ12:04 – 13:27शुभ
अमृत13:27 – 14:51शुभ
काल14:51 – 16:14टालें
शुभ16:14 – 17:37शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:37 – 19:14शुभ
चर19:14 – 20:51सामान्य
रोग20:51 – 22:28टालें
काल22:28 – 00:05टालें
लाभ00:05 – 01:41शुभ
उद्वेग01:41 – 03:18टालें
शुभ03:18 – 04:55शुभ
अमृत04:55 – 06:32शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3107:27दिन
मंगल07:2708:22दिन
सूर्य08:2209:18दिन
शुक्र09:1810:13दिन
बुध10:1311:09दिन
चंद्र11:0912:04दिन
शनि12:0413:00दिन
गुरु13:0013:55दिन
मंगल13:5514:51दिन
सूर्य14:5115:46दिन
शुक्र15:4616:42दिन
बुध16:4217:37दिन
चंद्र17:3718:42रात
शनि18:4219:46रात
गुरु19:4620:51रात
मंगल20:5121:55रात
सूर्य21:5523:00रात
शुक्र23:0000:05रात
बुध00:0501:09रात
चंद्र01:0902:14रात
शनि02:1403:18रात
गुरु03:1804:23रात
मंगल04:2305:27रात
सूर्य05:2706:32रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 नव॰ 2014शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 नव॰ 2014प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 नव॰ 2014कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
10 नव॰ 2014संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 नव॰ 2014कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 नव॰ 2014वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2014कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 नव॰ 2014प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 नव॰ 2014मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
26 नव॰ 2014विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0642° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।