17 अप्रैल 2015 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2015, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2015 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (06:53 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (19:48 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 18:47 पर है। राहुकाल 10:44 से 12:21 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 18:47
रात 05:53 तक
तिथि
चतुर्दशी, 03:37 तक
अमावस्या
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 19:48 तक
रेवती
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 अप्रैल 2015 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 06:53 तक
कृष्ण चतुर्दशी 03:37, 18 अप्रैल तक
अमावस्या 00:26, 19 अप्रैल तक
नक्षत्र
रेवती 17:22, 18 अप्रैल तक
योग
इंद्र 14:59 तक
वैधृतिअशुभ 11:11, 18 अप्रैल तक
करण
वणिज 06:53 तक
विष्टि (भद्रा) 17:15 तक
शकुनि 03:37, 18 अप्रैल तक
चतुष्पद 14:00, 18 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
18:47
चंद्रोदय
04:43
चंद्रास्त
17:21
दिनमान
12h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2072
शक संवत
1937, मन्मथ संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:46

अशुभ समय

राहुकाल
10:44 – 12:21
यमगंड
15:34 – 17:11
गुलिक काल
07:30 – 09:07

17 अप्रैल 2015 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:54 – 07:30सामान्य
लाभ07:30 – 09:07शुभ
अमृत09:07 – 10:44शुभ
काल10:44 – 12:21टालें
शुभ12:21 – 13:57शुभ
रोग13:57 – 15:34टालें
उद्वेग15:34 – 17:11टालें
चर17:11 – 18:47सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:47 – 20:10टालें
काल20:10 – 21:34टालें
लाभ21:34 – 22:57शुभ
उद्वेग22:57 – 00:20टालें
शुभ00:20 – 01:43शुभ
अमृत01:43 – 03:06शुभ
चर03:06 – 04:30सामान्य
रोग04:30 – 05:53टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5406:58दिन
बुध06:5808:03दिन
चंद्र08:0309:07दिन
शनि09:0710:12दिन
गुरु10:1211:16दिन
मंगल11:1612:21दिन
सूर्य12:2113:25दिन
शुक्र13:2514:29दिन
बुध14:2915:34दिन
चंद्र15:3416:38दिन
शनि16:3817:43दिन
गुरु17:4318:47दिन
मंगल18:4719:43रात
सूर्य19:4320:38रात
शुक्र20:3821:34रात
बुध21:3422:29रात
चंद्र22:2923:25रात
शनि23:2500:20रात
गुरु00:2001:15रात
मंगल01:1502:11रात
सूर्य02:1103:06रात
शुक्र03:0604:02रात
बुध04:0204:57रात
चंद्र04:5705:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अप्रैल 2015प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 अप्रैल 2015वैशाख अमावस्याअमावस्या
22 अप्रैल 2015विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 अप्रैल 2015शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 मई 2015प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 मई 2015वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
8 मई 2015संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 मई 2015कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 मई 2015कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मई 2015वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2015प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0706° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।