5 जून 2015 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 5 जून 2015, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 5 जून 2015 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (18:14 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (18:33 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:23 पर और सूर्यास्त 19:16 पर है। राहुकाल 10:35 से 12:19 तक है।

दिन और रात
दिन 05:23 – 19:16
रात 05:23 तक
तिथि
तृतीया, 18:14 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 18:33 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 जून 2015 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 18:14 तक
कृष्ण चतुर्थी 16:25, 6 जून तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 17:31, 6 जून तक
योग
शुक्ल 23:09 तक
ब्रह्म 20:36, 6 जून तक
करण
वणिज 07:03 तक
विष्टि (भद्रा) 18:14 तक
बव 05:21, 6 जून तक
बालव 16:25, 6 जून तक
चंद्र राशि
धनु 00:19, 6 जून तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:23
सूर्यास्त
19:16
चंद्रोदय
21:38
चंद्रास्त
07:48
दिनमान
13h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2072
शक संवत
1937, मन्मथ संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:42
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
10:35 – 12:19
यमगंड
15:47 – 17:32
गुलिक काल
07:07 – 08:51

5 जून 2015 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:23 – 07:07सामान्य
लाभ07:07 – 08:51शुभ
अमृत08:51 – 10:35शुभ
काल10:35 – 12:19टालें
शुभ12:19 – 14:03शुभ
रोग14:03 – 15:47टालें
उद्वेग15:47 – 17:32टालें
चर17:32 – 19:16सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:16 – 20:32टालें
काल20:32 – 21:47टालें
लाभ21:47 – 23:03शुभ
उद्वेग23:03 – 00:19टालें
शुभ00:19 – 01:35शुभ
अमृत01:35 – 02:51शुभ
चर02:51 – 04:07सामान्य
रोग04:07 – 05:23टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:2306:32दिन
बुध06:3207:41दिन
चंद्र07:4108:51दिन
शनि08:5110:00दिन
गुरु10:0011:10दिन
मंगल11:1012:19दिन
सूर्य12:1913:29दिन
शुक्र13:2914:38दिन
बुध14:3815:47दिन
चंद्र15:4716:57दिन
शनि16:5718:06दिन
गुरु18:0619:16दिन
मंगल19:1620:06रात
सूर्य20:0620:57रात
शुक्र20:5721:47रात
बुध21:4722:38रात
चंद्र22:3823:29रात
शनि23:2900:19रात
गुरु00:1901:10रात
मंगल01:1002:00रात
सूर्य02:0002:51रात
शुक्र02:5103:41रात
बुध03:4104:32रात
चंद्र04:3205:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 जून 2015संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 जून 2015कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 जून 2015कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जून 2015प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 जून 2015मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जून 2015आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
20 जून 2015विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 जून 2015शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 जून 2015प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 जुल॰ 2015अधिक आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0725° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।