11 जून 2015 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 11 जून 2015, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 11 जून 2015 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (05:59 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (10:58 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:22 पर और सूर्यास्त 19:18 पर है। राहुकाल 14:05 से 15:49 तक है।

दिन और रात
दिन 05:22 – 19:18
रात 05:22 तक
तिथि
दशमी, 03:52 तक
एकादशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 10:58 तक
रेवती
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 जून 2015 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण नवमी 05:59 तक
कृष्ण दशमी 03:52, 12 जून तक
कृष्ण एकादशी 01:49, 13 जून तक
नक्षत्र
रेवती 09:39, 12 जून तक
योग
आयुष्मान 06:50 तक
सौभाग्य 04:04, 12 जून तक
शोभन 01:22, 13 जून तक
करण
गर 05:59 तक
वणिज 16:55 तक
विष्टि (भद्रा) 03:52, 12 जून तक
बव 14:50, 12 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:22
सूर्यास्त
19:18
चंद्रोदय
01:19
चंद्रास्त
13:59
दिनमान
13h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2072
शक संवत
1937, मन्मथ संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:42
अभिजीत मुहूर्त
11:52 – 12:48

अशुभ समय

राहुकाल
14:05 – 15:49
यमगंड
05:22 – 07:07
गुलिक काल
08:51 – 10:36

11 जून 2015 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:22 – 07:07शुभ
रोग07:07 – 08:51टालें
उद्वेग08:51 – 10:36टालें
चर10:36 – 12:20सामान्य
लाभ12:20 – 14:05शुभ
अमृत14:05 – 15:49शुभ
काल15:49 – 17:34टालें
शुभ17:34 – 19:18शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:18 – 20:34शुभ
चर20:34 – 21:49सामान्य
रोग21:49 – 23:05टालें
काल23:05 – 00:20टालें
लाभ00:20 – 01:36शुभ
उद्वेग01:36 – 02:51टालें
शुभ02:51 – 04:07शुभ
अमृत04:07 – 05:22शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:2206:32दिन
मंगल06:3207:42दिन
सूर्य07:4208:51दिन
शुक्र08:5110:01दिन
बुध10:0111:11दिन
चंद्र11:1112:20दिन
शनि12:2013:30दिन
गुरु13:3014:40दिन
मंगल14:4015:49दिन
सूर्य15:4916:59दिन
शुक्र16:5918:09दिन
बुध18:0919:18दिन
चंद्र19:1820:09रात
शनि20:0920:59रात
गुरु20:5921:49रात
मंगल21:4922:40रात
सूर्य22:4023:30रात
शुक्र23:3000:20रात
बुध00:2001:11रात
चंद्र01:1102:01रात
शनि02:0102:51रात
गुरु02:5103:42रात
मंगल03:4204:32रात
सूर्य04:3205:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 जून 2015कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जून 2015प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 जून 2015मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जून 2015आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
20 जून 2015विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 जून 2015शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 जून 2015प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 जुल॰ 2015अधिक आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
5 जुल॰ 2015संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 जुल॰ 2015कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0727° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।