22 अक्टूबर 2015 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2015, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2015 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (11:58 तक), नक्षत्र श्रवण (13:28 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:25 पर और सूर्यास्त 17:45 पर है। राहुकाल 13:30 से 14:55 तक है।

दिन और रात
दिन 06:25 – 17:45
रात 06:26 तक
तिथि
नवमी, 11:58 तक
दशमी
नक्षत्र
श्रवण, 13:28 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अक्टूबर 2015 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल नवमी 11:58 तक
शुक्ल दशमी 09:51, 23 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 13:28 तक
धनिष्ठा 12:02, 23 अक्टू॰ तक
योग
शूलअशुभ 16:54 तक
गंडअशुभ 13:55, 23 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 11:58 तक
तैतिल 22:59 तक
गर 09:51, 23 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मकर 00:49, 23 अक्टू॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:25
सूर्यास्त
17:45
चंद्रोदय
14:03
चंद्रास्त
00:35
दिनमान
11h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2072
शक संवत
1937, मन्मथ संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:44 – 05:35
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:28

अशुभ समय

राहुकाल
13:30 – 14:55
यमगंड
06:25 – 07:50
गुलिक काल
09:15 – 10:40

22 अक्टूबर 2015 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:25 – 07:50शुभ
रोग07:50 – 09:15टालें
उद्वेग09:15 – 10:40टालें
चर10:40 – 12:05सामान्य
लाभ12:05 – 13:30शुभ
अमृत13:30 – 14:55शुभ
काल14:55 – 16:20टालें
शुभ16:20 – 17:45शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:45 – 19:20शुभ
चर19:20 – 20:55सामान्य
रोग20:55 – 22:30टालें
काल22:30 – 00:05टालें
लाभ00:05 – 01:41शुभ
उद्वेग01:41 – 03:16टालें
शुभ03:16 – 04:51शुभ
अमृत04:51 – 06:26शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:2507:22दिन
मंगल07:2208:19दिन
सूर्य08:1909:15दिन
शुक्र09:1510:12दिन
बुध10:1211:08दिन
चंद्र11:0812:05दिन
शनि12:0513:02दिन
गुरु13:0213:58दिन
मंगल13:5814:55दिन
सूर्य14:5515:51दिन
शुक्र15:5116:48दिन
बुध16:4817:45दिन
चंद्र17:4518:48रात
शनि18:4819:52रात
गुरु19:5220:55रात
मंगल20:5521:58रात
सूर्य21:5823:02रात
शुक्र23:0200:05रात
बुध00:0501:09रात
चंद्र01:0902:12रात
शनि02:1203:16रात
गुरु03:1604:19रात
मंगल04:1905:23रात
सूर्य05:2306:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 अक्टू॰ 2015शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
25 अक्टू॰ 2015प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
27 अक्टू॰ 2015आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
30 अक्टू॰ 2015संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 नव॰ 2015कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 नव॰ 2015कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 नव॰ 2015प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 नव॰ 2015कार्तिक अमावस्याअमावस्या
15 नव॰ 2015विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 नव॰ 2015वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0778° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।