10 फ़रवरी 2016 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 10 फ़रवरी 2016, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 10 फ़रवरी 2016 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (14:52 तक), नक्षत्र शतभिषा (13:15 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 07:04 पर और सूर्यास्त 18:07 पर है। राहुकाल 12:35 से 13:58 तक है।

दिन और रात
दिन 07:04 – 18:07
रात 07:03 तक
तिथि
द्वितीया, 14:52 तक
तृतीया
नक्षत्र
शतभिषा, 13:15 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 फ़रवरी 2016 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 14:52 तक
शुक्ल तृतीया 12:03, 11 फ़र॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 13:15 तक
पूर्वा भाद्रपद 11:09, 11 फ़र॰ तक
योग
परिघअशुभ 07:44 तक
शिव 04:14, 11 फ़र॰ तक
सिद्ध 00:44, 12 फ़र॰ तक
करण
कौलव 14:52 तक
तैतिल 01:27, 11 फ़र॰ तक
गर 12:03, 11 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 05:41, 11 फ़र॰ तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:04
सूर्यास्त
18:07
चंद्रोदय
08:05
चंद्रास्त
20:06
दिनमान
11h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2072
शक संवत
1937, मन्मथ संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:20 – 06:12
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 12:57 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:35 – 13:58
यमगंड
08:26 – 09:49
गुलिक काल
11:12 – 12:35

10 फ़रवरी 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:04 – 08:26शुभ
अमृत08:26 – 09:49शुभ
काल09:49 – 11:12टालें
शुभ11:12 – 12:35शुभ
रोग12:35 – 13:58टालें
उद्वेग13:58 – 15:21टालें
चर15:21 – 16:44सामान्य
लाभ16:44 – 18:07शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:07 – 19:44टालें
शुभ19:44 – 21:21शुभ
अमृत21:21 – 22:58शुभ
चर22:58 – 00:35सामान्य
रोग00:35 – 02:12टालें
काल02:12 – 03:49टालें
लाभ03:49 – 05:26शुभ
उद्वेग05:26 – 07:03टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:0407:59दिन
चंद्र07:5908:54दिन
शनि08:5409:49दिन
गुरु09:4910:45दिन
मंगल10:4511:40दिन
सूर्य11:4012:35दिन
शुक्र12:3513:30दिन
बुध13:3014:26दिन
चंद्र14:2615:21दिन
शनि15:2116:16दिन
गुरु16:1617:11दिन
मंगल17:1118:07दिन
सूर्य18:0719:11रात
शुक्र19:1120:16रात
बुध20:1621:21रात
चंद्र21:2122:25रात
शनि22:2523:30रात
गुरु23:3000:35रात
मंगल00:3501:39रात
सूर्य01:3902:44रात
शुक्र02:4403:49रात
बुध03:4904:53रात
चंद्र04:5305:58रात
शनि05:5807:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 फ़र॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2016कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
18 फ़र॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 फ़र॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 फ़र॰ 2016माघ पूर्णिमापूर्णिमा
26 फ़र॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 मार्च 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 मार्च 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 मार्च 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 मार्च 2016फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0821° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।