1 सितंबर 2016 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 1 सितंबर 2016, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 1 सितंबर 2016 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (14:33 तक), नक्षत्र मघा (10:52 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:59 पर और सूर्यास्त 18:42 पर है। राहुकाल 13:56 से 15:31 तक है।

दिन और रात
दिन 05:59 – 18:42
रात 05:59 तक
तिथि
अमावस्या, 14:33 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
मघा, 10:52 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 सितंबर 2016 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
अमावस्या 14:33 तक
शुक्ल प्रतिपदा 15:32, 2 सित॰ तक
नक्षत्र
मघा 10:52 तक
पूर्वा फाल्गुनी 12:25, 2 सित॰ तक
योग
शिव 07:44 तक
सिद्ध 07:23, 2 सित॰ तक
करण
नाग 14:33 तक
किंस्तुघ्न 02:59, 2 सित॰ तक
बव 15:32, 2 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:59
सूर्यास्त
18:42
चंद्रोदय
05:44
चंद्रास्त
18:43
दिनमान
12h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:29 – 05:14
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:46

अशुभ समय

राहुकाल
13:56 – 15:31
यमगंड
05:59 – 07:34
गुलिक काल
09:10 – 10:45

1 सितंबर 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:59 – 07:34शुभ
रोग07:34 – 09:10टालें
उद्वेग09:10 – 10:45टालें
चर10:45 – 12:20सामान्य
लाभ12:20 – 13:56शुभ
अमृत13:56 – 15:31शुभ
काल15:31 – 17:07टालें
शुभ17:07 – 18:42शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:42 – 20:07शुभ
चर20:07 – 21:31सामान्य
रोग21:31 – 22:56टालें
काल22:56 – 00:21टालें
लाभ00:21 – 01:45शुभ
उद्वेग01:45 – 03:10टालें
शुभ03:10 – 04:35शुभ
अमृत04:35 – 05:59शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5907:02दिन
मंगल07:0208:06दिन
सूर्य08:0609:10दिन
शुक्र09:1010:13दिन
बुध10:1311:17दिन
चंद्र11:1712:20दिन
शनि12:2013:24दिन
गुरु13:2414:28दिन
मंगल14:2815:31दिन
सूर्य15:3116:35दिन
शुक्र16:3517:38दिन
बुध17:3818:42दिन
चंद्र18:4219:38रात
शनि19:3820:35रात
गुरु20:3521:31रात
मंगल21:3122:28रात
सूर्य22:2823:24रात
शुक्र23:2400:21रात
बुध00:2101:17रात
चंद्र01:1702:14रात
शनि02:1403:10रात
गुरु03:1004:06रात
मंगल04:0605:03रात
सूर्य05:0305:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 सित॰ 2016भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
5 सित॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 सित॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 सित॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
16 सित॰ 2016भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
16 सित॰ 2016कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सित॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 सित॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 सित॰ 2016आश्विन अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0899° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।