30 नवंबर 2016 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 30 नवंबर 2016, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 30 नवंबर 2016 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (20:05 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (02:36, 1 दिस॰ तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:55 पर और सूर्यास्त 17:23 पर है। राहुकाल 12:09 से 13:28 तक है।

दिन और रात
दिन 06:55 – 17:23
रात 06:56 तक
तिथि
प्रतिपदा, 20:05 तक
द्वितीया
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 02:36 तक
मूल
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 नवंबर 2016 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 20:05 तक
शुक्ल द्वितीया 22:09, 1 दिस॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 02:36, 1 दिस॰ तक
मूल 05:04, 2 दिस॰ तक
योग
धृति 05:39, 1 दिस॰ तक
शूलअशुभ 06:03, 2 दिस॰ तक
करण
किंस्तुघ्न 06:58 तक
बव 20:05 तक
बालव 09:09, 1 दिस॰ तक
चंद्र राशि
वृश्चिक 02:36, 1 दिस॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:55
सूर्यास्त
17:23
चंद्रोदय
07:18
चंद्रास्त
18:17
दिनमान
10h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:07 – 06:01
अभिजीत मुहूर्त
11:48 – 12:30 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:09 – 13:28
यमगंड
08:14 – 09:32
गुलिक काल
10:51 – 12:09

30 नवंबर 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:55 – 08:14शुभ
अमृत08:14 – 09:32शुभ
काल09:32 – 10:51टालें
शुभ10:51 – 12:09शुभ
रोग12:09 – 13:28टालें
उद्वेग13:28 – 14:46टालें
चर14:46 – 16:05सामान्य
लाभ16:05 – 17:23शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:23 – 19:05टालें
शुभ19:05 – 20:47शुभ
अमृत20:47 – 22:28शुभ
चर22:28 – 00:10सामान्य
रोग00:10 – 01:51टालें
काल01:51 – 03:33टालें
लाभ03:33 – 05:14शुभ
उद्वेग05:14 – 06:56टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:5507:48दिन
चंद्र07:4808:40दिन
शनि08:4009:32दिन
गुरु09:3210:25दिन
मंगल10:2511:17दिन
सूर्य11:1712:09दिन
शुक्र12:0913:02दिन
बुध13:0213:54दिन
चंद्र13:5414:46दिन
शनि14:4615:39दिन
गुरु15:3916:31दिन
मंगल16:3117:23दिन
सूर्य17:2318:31रात
शुक्र18:3119:39रात
बुध19:3920:47रात
चंद्र20:4721:54रात
शनि21:5423:02रात
गुरु23:0200:10रात
मंगल00:1001:17रात
सूर्य01:1702:25रात
शुक्र02:2503:33रात
बुध03:3304:41रात
चंद्र04:4105:48रात
शनि05:4806:56रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 दिस॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 दिस॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 दिस॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2016मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
15 दिस॰ 2016धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 दिस॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 दिस॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 दिस॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 दिस॰ 2016पौष अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0933° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।