30 दिसंबर 2016 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2016, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2016 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (13:48 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (13:12 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 07:13 पर और सूर्यास्त 17:34 पर है। राहुकाल 11:06 से 12:23 तक है।

दिन और रात
दिन 07:13 – 17:34
रात 07:13 तक
तिथि
प्रतिपदा, 13:48 तक
द्वितीया
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 13:12 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 दिसंबर 2016 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 13:48 तक
शुक्ल द्वितीया 14:52, 31 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 14:47, 31 दिस॰ तक
योग
ध्रुव 10:19 तक
व्याघातअशुभ 10:01, 31 दिस॰ तक
करण
बव 13:48 तक
बालव 02:23, 31 दिस॰ तक
कौलव 14:52, 31 दिस॰ तक
चंद्र राशि
धनु 19:38 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:13
सूर्यास्त
17:34
चंद्रोदय
07:43
चंद्रास्त
18:41
दिनमान
10h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:24 – 06:18
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
11:06 – 12:23
यमगंड
14:59 – 16:16
गुलिक काल
08:30 – 09:48

30 दिसंबर 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:13 – 08:30सामान्य
लाभ08:30 – 09:48शुभ
अमृत09:48 – 11:06शुभ
काल11:06 – 12:23टालें
शुभ12:23 – 13:41शुभ
रोग13:41 – 14:59टालें
उद्वेग14:59 – 16:16टालें
चर16:16 – 17:34सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:34 – 19:16टालें
काल19:16 – 20:59टालें
लाभ20:59 – 22:41शुभ
उद्वेग22:41 – 00:23टालें
शुभ00:23 – 02:06शुभ
अमृत02:06 – 03:48शुभ
चर03:48 – 05:31सामान्य
रोग05:31 – 07:13टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:1308:05दिन
बुध08:0508:56दिन
चंद्र08:5609:48दिन
शनि09:4810:40दिन
गुरु10:4011:32दिन
मंगल11:3212:23दिन
सूर्य12:2313:15दिन
शुक्र13:1514:07दिन
बुध14:0714:59दिन
चंद्र14:5915:50दिन
शनि15:5016:42दिन
गुरु16:4217:34दिन
मंगल17:3418:42रात
सूर्य18:4219:50रात
शुक्र19:5020:59रात
बुध20:5922:07रात
चंद्र22:0723:15रात
शनि23:1500:23रात
गुरु00:2301:32रात
मंगल01:3202:40रात
सूर्य02:4003:48रात
शुक्र03:4804:57रात
बुध04:5706:05रात
चंद्र06:0507:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 जन॰ 2017विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 जन॰ 2017शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जन॰ 2017प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 जन॰ 2017पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2017मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2017संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 जन॰ 2017कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 जन॰ 2017कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 जन॰ 2017प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 जन॰ 2017माघ अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0945° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।