17 मई 2017 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 17 मई 2017, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 17 मई 2017 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (16:31 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (07:25 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:29 पर और सूर्यास्त 19:06 पर है। राहुकाल 12:17 से 13:59 तक है।

दिन और रात
दिन 05:29 – 19:06
रात 05:28 तक
तिथि
षष्ठी, 16:31 तक
सप्तमी
नक्षत्र
श्रवण
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 मई 2017 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 16:31 तक
कृष्ण सप्तमी 17:42, 18 मई तक
नक्षत्र
श्रवण 09:26, 18 मई तक
योग
शुक्ल 21:28 तक
ब्रह्म 21:20, 18 मई तक
करण
वणिज 16:31 तक
विष्टि (भद्रा) 05:12, 18 मई तक
बव 17:42, 18 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:29
सूर्यास्त
19:06
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
10:32
दिनमान
13h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2074
शक संवत
1939, हेमलंब संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:06 – 04:47
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:44 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:17 – 13:59
यमगंड
07:11 – 08:53
गुलिक काल
10:35 – 12:17

17 मई 2017 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:29 – 07:11शुभ
अमृत07:11 – 08:53शुभ
काल08:53 – 10:35टालें
शुभ10:35 – 12:17शुभ
रोग12:17 – 13:59टालें
उद्वेग13:59 – 15:41टालें
चर15:41 – 17:23सामान्य
लाभ17:23 – 19:06शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:06 – 20:23टालें
शुभ20:23 – 21:41शुभ
अमृत21:41 – 22:59शुभ
चर22:59 – 00:17सामान्य
रोग00:17 – 01:35टालें
काल01:35 – 02:53टालें
लाभ02:53 – 04:10शुभ
उद्वेग04:10 – 05:28टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:2906:37दिन
चंद्र06:3707:45दिन
शनि07:4508:53दिन
गुरु08:5310:01दिन
मंगल10:0111:09दिन
सूर्य11:0912:17दिन
शुक्र12:1713:25दिन
बुध13:2514:33दिन
चंद्र14:3315:41दिन
शनि15:4116:49दिन
गुरु16:4917:57दिन
मंगल17:5719:06दिन
सूर्य19:0619:57रात
शुक्र19:5720:49रात
बुध20:4921:41रात
चंद्र21:4122:33रात
शनि22:3323:25रात
गुरु23:2500:17रात
मंगल00:1701:09रात
सूर्य01:0902:01रात
शुक्र02:0102:53रात
बुध02:5303:45रात
चंद्र03:4504:36रात
शनि04:3605:28रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 मई 2017कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
22 मई 2017कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 मई 2017प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 मई 2017ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
29 मई 2017विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 जून 2017शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 जून 2017प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 जून 2017ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
13 जून 2017संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जून 2017मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0997° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।