12 फ़रवरी 2018 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 12 फ़रवरी 2018, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 12 फ़रवरी 2018 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (20:04 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (02:03, 13 फ़र॰ तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 07:02 पर और सूर्यास्त 18:08 पर है। राहुकाल 08:25 से 09:48 तक है।

दिन और रात
दिन 07:02 – 18:08
रात 07:01 तक
तिथि
द्वादशी, 20:04 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 02:03 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 फ़रवरी 2018 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 20:04 तक
कृष्ण त्रयोदशी 22:34, 13 फ़र॰ तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 02:03, 13 फ़र॰ तक
उत्तराषाढ़ा 04:56, 14 फ़र॰ तक
योग
वज्रअशुभ 13:39 तक
सिद्धि 14:32, 13 फ़र॰ तक
करण
तैतिल 20:04 तक
गर 09:21, 13 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:02
सूर्यास्त
18:08
चंद्रोदय
04:22
चंद्रास्त
15:11
दिनमान
11h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2074
शक संवत
1939, हेमलंब संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:18 – 06:10
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
08:25 – 09:48
यमगंड
11:12 – 12:35
गुलिक काल
13:58 – 15:22

12 फ़रवरी 2018 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:02 – 08:25शुभ
काल08:25 – 09:48टालें
शुभ09:48 – 11:12शुभ
रोग11:12 – 12:35टालें
उद्वेग12:35 – 13:58टालें
चर13:58 – 15:22सामान्य
लाभ15:22 – 16:45शुभ
अमृत16:45 – 18:08शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:08 – 19:45सामान्य
रोग19:45 – 21:22टालें
काल21:22 – 22:58टालें
लाभ22:58 – 00:35शुभ
उद्वेग00:35 – 02:11टालें
शुभ02:11 – 03:48शुभ
अमृत03:48 – 05:24शुभ
चर05:24 – 07:01सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:0207:57दिन
शनि07:5708:53दिन
गुरु08:5309:48दिन
मंगल09:4810:44दिन
सूर्य10:4411:39दिन
शुक्र11:3912:35दिन
बुध12:3513:31दिन
चंद्र13:3114:26दिन
शनि14:2615:22दिन
गुरु15:2216:17दिन
मंगल16:1717:13दिन
सूर्य17:1318:08दिन
शुक्र18:0819:13रात
बुध19:1320:17रात
चंद्र20:1721:22रात
शनि21:2222:26रात
गुरु22:2623:30रात
मंगल23:3000:35रात
सूर्य00:3501:39रात
शुक्र01:3902:43रात
बुध02:4303:48रात
चंद्र03:4804:52रात
शनि04:5205:56रात
गुरु05:5607:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 फ़र॰ 2018प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 फ़र॰ 2018कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2018फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
19 फ़र॰ 2018विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 फ़र॰ 2018शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 फ़र॰ 2018प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 मार्च 2018फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
5 मार्च 2018संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 मार्च 2018कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 मार्च 2018कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1101° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।