14 मार्च 2018 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 14 मार्च 2018, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 14 मार्च 2018 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (15:45 तक), नक्षत्र श्रवण (15:06 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:32 पर और सूर्यास्त 18:28 पर है। राहुकाल 12:30 से 14:00 तक है।

दिन और रात
दिन 06:32 – 18:28
रात 06:31 तक
तिथि
द्वादशी, 15:45 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
श्रवण, 15:06 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 मार्च 2018 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 15:45 तक
कृष्ण त्रयोदशी 17:19, 15 मार्च तक
नक्षत्र
श्रवण 15:06 तक
धनिष्ठा 17:12, 15 मार्च तक
योग
शिव 21:49 तक
सिद्ध 21:51, 15 मार्च तक
करण
तैतिल 15:45 तक
गर 04:37, 15 मार्च तक
वणिज 17:19, 15 मार्च तक
चंद्र राशि
मकर 04:13, 15 मार्च तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:32
सूर्यास्त
18:28
चंद्रोदय
04:31
चंद्रास्त
15:38
दिनमान
11h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2074
शक संवत
1939, हेमलंब संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:44
अभिजीत मुहूर्त
12:06 – 12:54 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:30 – 14:00
यमगंड
08:01 – 09:31
गुलिक काल
11:01 – 12:30

14 मार्च 2018 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:32 – 08:01शुभ
अमृत08:01 – 09:31शुभ
काल09:31 – 11:01टालें
शुभ11:01 – 12:30शुभ
रोग12:30 – 14:00टालें
उद्वेग14:00 – 15:29टालें
चर15:29 – 16:59सामान्य
लाभ16:59 – 18:28शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:28 – 19:59टालें
शुभ19:59 – 21:29शुभ
अमृत21:29 – 22:59शुभ
चर22:59 – 00:30सामान्य
रोग00:30 – 02:00टालें
काल02:00 – 03:30टालें
लाभ03:30 – 05:00शुभ
उद्वेग05:00 – 06:31टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3207:32दिन
चंद्र07:3208:31दिन
शनि08:3109:31दिन
गुरु09:3110:31दिन
मंगल10:3111:30दिन
सूर्य11:3012:30दिन
शुक्र12:3013:30दिन
बुध13:3014:30दिन
चंद्र14:3015:29दिन
शनि15:2916:29दिन
गुरु16:2917:29दिन
मंगल17:2918:28दिन
सूर्य18:2819:29रात
शुक्र19:2920:29रात
बुध20:2921:29रात
चंद्र21:2922:29रात
शनि22:2923:29रात
गुरु23:2900:30रात
मंगल00:3001:30रात
सूर्य01:3002:30रात
शुक्र02:3003:30रात
बुध03:3004:30रात
चंद्र04:3005:31रात
शनि05:3106:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 मार्च 2018मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्च 2018प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 मार्च 2018चैत्र अमावस्याअमावस्या
21 मार्च 2018विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 मार्च 2018शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 मार्च 2018प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 मार्च 2018चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
4 अप्रैल 2018संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 अप्रैल 2018कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 अप्रैल 2018कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1113° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।