20 जून 2018 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 20 जून 2018, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 20 जून 2018 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (03:51, 21 जून तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (01:18, 21 जून तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:23 पर और सूर्यास्त 19:21 पर है। राहुकाल 12:22 से 14:07 तक है।

दिन और रात
दिन 05:23 – 19:21
रात 05:23 तक
तिथि
अष्टमी, 03:51 तक
नवमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 01:18 तक
हस्त
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 जून 2018 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 03:51, 21 जून तक
शुक्ल नवमी 03:18, 22 जून तक
नक्षत्र
हस्त 01:26, 22 जून तक
योग
सिद्धि 05:29 तक
व्यतीपातअशुभ 03:33, 21 जून तक
वरीयान 02:06, 22 जून तक
करण
विष्टि (भद्रा) 16:20 तक
बव 03:51, 21 जून तक
बालव 15:30, 21 जून तक
चंद्र राशि
सिंह 07:35 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:23
सूर्यास्त
19:21
चंद्रोदय
12:11
चंद्रास्त
00:13
दिनमान
13h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2075
शक संवत
1940, विलंब संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:03 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:50 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:22 – 14:07
यमगंड
07:08 – 08:53
गुलिक काल
10:37 – 12:22

20 जून 2018 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:23 – 07:08शुभ
अमृत07:08 – 08:53शुभ
काल08:53 – 10:37टालें
शुभ10:37 – 12:22शुभ
रोग12:22 – 14:07टालें
उद्वेग14:07 – 15:52टालें
चर15:52 – 17:36सामान्य
लाभ17:36 – 19:21शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:21 – 20:36टालें
शुभ20:36 – 21:52शुभ
अमृत21:52 – 23:07शुभ
चर23:07 – 00:22सामान्य
रोग00:22 – 01:38टालें
काल01:38 – 02:53टालें
लाभ02:53 – 04:08शुभ
उद्वेग04:08 – 05:23टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:2306:33दिन
चंद्र06:3307:43दिन
शनि07:4308:53दिन
गुरु08:5310:03दिन
मंगल10:0311:12दिन
सूर्य11:1212:22दिन
शुक्र12:2213:32दिन
बुध13:3214:42दिन
चंद्र14:4215:52दिन
शनि15:5217:02दिन
गुरु17:0218:11दिन
मंगल18:1119:21दिन
सूर्य19:2120:11रात
शुक्र20:1121:02रात
बुध21:0221:52रात
चंद्र21:5222:42रात
शनि22:4223:32रात
गुरु23:3200:22रात
मंगल00:2201:12रात
सूर्य01:1202:03रात
शुक्र02:0302:53रात
बुध02:5303:43रात
चंद्र03:4304:33रात
शनि04:3305:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 जून 2018शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
25 जून 2018प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 जून 2018ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
2 जुल॰ 2018संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 जुल॰ 2018कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 जुल॰ 2018कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 जुल॰ 2018प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 जुल॰ 2018आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
16 जुल॰ 2018विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 जुल॰ 2018कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1150° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।