27 अक्टूबर 2018 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 27 अक्टूबर 2018, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 27 अक्टूबर 2018 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (18:38 तक), नक्षत्र कृत्तिका (08:20 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 06:29 पर और सूर्यास्त 17:40 पर है। राहुकाल 09:17 से 10:41 तक है।

दिन और रात
दिन 06:29 – 17:40
रात 06:30 तक
तिथि
तृतीया, 18:38 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
रोहिणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 अक्टूबर 2018 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 18:38 तक
कृष्ण चतुर्थी 16:54, 28 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 07:23, 28 अक्टू॰ तक
योग
वरीयान 01:16, 28 अक्टू॰ तक
परिघअशुभ 22:40, 28 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 07:25 तक
विष्टि (भद्रा) 18:38 तक
बव 05:47, 28 अक्टू॰ तक
बालव 16:54, 28 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:29
सूर्यास्त
17:40
चंद्रोदय
19:55
चंद्रास्त
08:49
दिनमान
11h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2075
शक संवत
1940, विलंब संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:46 – 05:38
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
09:17 – 10:41
यमगंड
13:28 – 14:52
गुलिक काल
06:29 – 07:53

27 अक्टूबर 2018 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:29 – 07:53टालें
शुभ07:53 – 09:17शुभ
रोग09:17 – 10:41टालें
उद्वेग10:41 – 12:04टालें
चर12:04 – 13:28सामान्य
लाभ13:28 – 14:52शुभ
अमृत14:52 – 16:16शुभ
काल16:16 – 17:40टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:40 – 19:16शुभ
उद्वेग19:16 – 20:52टालें
शुभ20:52 – 22:28शुभ
अमृत22:28 – 00:05शुभ
चर00:05 – 01:41सामान्य
रोग01:41 – 03:17टालें
काल03:17 – 04:53टालें
लाभ04:53 – 06:30शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:2907:25दिन
गुरु07:2508:21दिन
मंगल08:2109:17दिन
सूर्य09:1710:13दिन
शुक्र10:1311:08दिन
बुध11:0812:04दिन
चंद्र12:0413:00दिन
शनि13:0013:56दिन
गुरु13:5614:52दिन
मंगल14:5215:48दिन
सूर्य15:4816:44दिन
शुक्र16:4417:40दिन
बुध17:4018:44रात
चंद्र18:4419:48रात
शनि19:4820:52रात
गुरु20:5221:56रात
मंगल21:5623:01रात
सूर्य23:0100:05रात
शुक्र00:0501:09रात
बुध01:0902:13रात
चंद्र02:1303:17रात
शनि03:1704:21रात
गुरु04:2105:25रात
मंगल05:2506:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 अक्टू॰ 2018संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 नव॰ 2018कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 नव॰ 2018कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 नव॰ 2018प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 नव॰ 2018कार्तिक अमावस्याअमावस्या
11 नव॰ 2018विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2018वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नव॰ 2018शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
21 नव॰ 2018प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 नव॰ 2018कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1199° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।