20 दिसंबर 2018 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 20 दिसंबर 2018, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 20 दिसंबर 2018 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (04:34, 21 दिस॰ तक), नक्षत्र कृत्तिका (03:04, 21 दिस॰ तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 07:08 पर और सूर्यास्त 17:28 पर है। राहुकाल 13:36 से 14:53 तक है।

दिन और रात
दिन 07:08 – 17:28
रात 07:09 तक
तिथि
त्रयोदशी, 04:34 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 03:04 तक
रोहिणी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 दिसंबर 2018 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 04:34, 21 दिस॰ तक
शुक्ल चतुर्दशी 02:09, 22 दिस॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 03:04, 21 दिस॰ तक
रोहिणी 01:22, 22 दिस॰ तक
योग
सिद्ध 19:24 तक
साध्य 16:24, 21 दिस॰ तक
करण
कौलव 17:35 तक
तैतिल 04:34, 21 दिस॰ तक
गर 15:25, 21 दिस॰ तक
चंद्र राशि
मेष 09:58 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:08
सूर्यास्त
17:28
चंद्रोदय
15:36
चंद्रास्त
04:15
दिनमान
10h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2075
शक संवत
1940, विलंब संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:19 – 06:14
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
13:36 – 14:53
यमगंड
07:08 – 08:26
गुलिक काल
09:43 – 11:01

20 दिसंबर 2018 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:08 – 08:26शुभ
रोग08:26 – 09:43टालें
उद्वेग09:43 – 11:01टालें
चर11:01 – 12:18सामान्य
लाभ12:18 – 13:36शुभ
अमृत13:36 – 14:53शुभ
काल14:53 – 16:10टालें
शुभ16:10 – 17:28शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:28 – 19:10शुभ
चर19:10 – 20:53सामान्य
रोग20:53 – 22:36टालें
काल22:36 – 00:18टालें
लाभ00:18 – 02:01शुभ
उद्वेग02:01 – 03:44टालें
शुभ03:44 – 05:26शुभ
अमृत05:26 – 07:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:0808:00दिन
मंगल08:0008:52दिन
सूर्य08:5209:43दिन
शुक्र09:4310:35दिन
बुध10:3511:26दिन
चंद्र11:2612:18दिन
शनि12:1813:10दिन
गुरु13:1014:01दिन
मंगल14:0114:53दिन
सूर्य14:5315:45दिन
शुक्र15:4516:36दिन
बुध16:3617:28दिन
चंद्र17:2818:36रात
शनि18:3619:45रात
गुरु19:4520:53रात
मंगल20:5322:02रात
सूर्य22:0223:10रात
शुक्र23:1000:18रात
बुध00:1801:27रात
चंद्र01:2702:35रात
शनि02:3503:44रात
गुरु03:4404:52रात
मंगल04:5206:01रात
सूर्य06:0107:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 दिस॰ 2018प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 दिस॰ 2018मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
26 दिस॰ 2018संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 दिस॰ 2018कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 जन॰ 2019कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 जन॰ 2019प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 जन॰ 2019पौष अमावस्याअमावस्या
10 जन॰ 2019विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2019मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
17 जन॰ 2019शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1220° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।