12 दिसंबर 2019 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 12 दिसंबर 2019, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 12 दिसंबर 2019 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (10:42 तक), नक्षत्र मृगशिरा (06:18, 13 दिस॰ तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 07:03 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 13:32 से 14:49 तक है।

दिन और रात
दिन 07:03 – 17:25
रात 07:04 तक
तिथि
पूर्णिमा, 10:42 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
मृगशिरा, 06:18 तक
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 दिसंबर 2019 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
पूर्णिमा 10:42 तक
कृष्ण प्रतिपदा 09:56, 13 दिस॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 06:18, 13 दिस॰ तक
आर्द्रा 05:50, 14 दिस॰ तक
योग
साध्य 13:50 तक
शुभ 11:59, 13 दिस॰ तक
करण
बव 10:42 तक
बालव 22:22 तक
कौलव 09:56, 13 दिस॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 18:23 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:03
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
17:40
चंद्रास्त
06:54
दिनमान
10h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2076
शक संवत
1941, विकारी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:14 – 06:09
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:35

अशुभ समय

राहुकाल
13:32 – 14:49
यमगंड
07:03 – 08:21
गुलिक काल
09:39 – 10:56

12 दिसंबर 2019 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:03 – 08:21शुभ
रोग08:21 – 09:39टालें
उद्वेग09:39 – 10:56टालें
चर10:56 – 12:14सामान्य
लाभ12:14 – 13:32शुभ
अमृत13:32 – 14:49शुभ
काल14:49 – 16:07टालें
शुभ16:07 – 17:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:25 – 19:07शुभ
चर19:07 – 20:50सामान्य
रोग20:50 – 22:32टालें
काल22:32 – 00:14टालें
लाभ00:14 – 01:57शुभ
उद्वेग01:57 – 03:39टालें
शुभ03:39 – 05:22शुभ
अमृत05:22 – 07:04शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:0307:55दिन
मंगल07:5508:47दिन
सूर्य08:4709:39दिन
शुक्र09:3910:31दिन
बुध10:3111:22दिन
चंद्र11:2212:14दिन
शनि12:1413:06दिन
गुरु13:0613:58दिन
मंगल13:5814:49दिन
सूर्य14:4915:41दिन
शुक्र15:4116:33दिन
बुध16:3317:25दिन
चंद्र17:2518:33रात
शनि18:3319:41रात
गुरु19:4120:50रात
मंगल20:5021:58रात
सूर्य21:5823:06रात
शुक्र23:0600:14रात
बुध00:1401:23रात
चंद्र01:2302:31रात
शनि02:3103:39रात
गुरु03:3904:48रात
मंगल04:4805:56रात
सूर्य05:5607:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 दिस॰ 2019मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
15 दिस॰ 2019संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 दिस॰ 2019धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
19 दिस॰ 2019कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
22 दिस॰ 2019कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 दिस॰ 2019प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 दिस॰ 2019पौष अमावस्याअमावस्या
30 दिस॰ 2019विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 जन॰ 2020शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 जन॰ 2020प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 जन॰ 2020पौष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1357° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।