22 अप्रैल 2020 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 22 अप्रैल 2020, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 22 अप्रैल 2020 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (07:55, 23 अप्रैल तक), नक्षत्र रेवती (13:17 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 18:51 पर है। राहुकाल 12:19 से 13:57 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 18:51
रात 05:47 तक
तिथि
अमावस्या
नक्षत्र
रेवती, 13:17 तक
अश्विनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अप्रैल 2020 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
अमावस्या 07:55, 23 अप्रैल तक
नक्षत्र
रेवती 13:17 तक
अश्विनी 16:04, 23 अप्रैल तक
योग
विष्कंभअशुभ 22:16 तक
प्रीति 22:59, 23 अप्रैल तक
करण
चतुष्पद 18:48 तक
नाग 07:55, 23 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मीन 13:17 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
18:51
चंद्रोदय
05:34
चंद्रास्त
18:15
दिनमान
13h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2077
शक संवत
1942, शार्वरी संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:20 – 05:04
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:45 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:19 – 13:57
यमगंड
07:26 – 09:04
गुलिक काल
10:42 – 12:19

22 अप्रैल 2020 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:48 – 07:26शुभ
अमृत07:26 – 09:04शुभ
काल09:04 – 10:42टालें
शुभ10:42 – 12:19शुभ
रोग12:19 – 13:57टालें
उद्वेग13:57 – 15:35टालें
चर15:35 – 17:13सामान्य
लाभ17:13 – 18:51शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:51 – 20:13टालें
शुभ20:13 – 21:35शुभ
अमृत21:35 – 22:57शुभ
चर22:57 – 00:19सामान्य
रोग00:19 – 01:41टालें
काल01:41 – 03:03टालें
लाभ03:03 – 04:25शुभ
उद्वेग04:25 – 05:47टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4806:53दिन
चंद्र06:5307:58दिन
शनि07:5809:04दिन
गुरु09:0410:09दिन
मंगल10:0911:14दिन
सूर्य11:1412:19दिन
शुक्र12:1913:25दिन
बुध13:2514:30दिन
चंद्र14:3015:35दिन
शनि15:3516:40दिन
गुरु16:4017:45दिन
मंगल17:4518:51दिन
सूर्य18:5119:45रात
शुक्र19:4520:40रात
बुध20:4021:35रात
चंद्र21:3522:29रात
शनि22:2923:24रात
गुरु23:2400:19रात
मंगल00:1901:14रात
सूर्य01:1402:08रात
शुक्र02:0803:03रात
बुध03:0303:58रात
चंद्र03:5804:52रात
शनि04:5205:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 अप्रैल 2020वैशाख अमावस्याअमावस्या
27 अप्रैल 2020विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
4 मई 2020शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 मई 2020प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 मई 2020वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
11 मई 2020संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मई 2020वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
15 मई 2020कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
18 मई 2020कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 मई 2020प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1407° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।