20 दिसंबर 2020 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 20 दिसंबर 2020, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 20 दिसंबर 2020 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (14:53 तक), नक्षत्र शतभिषा (21:01 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 07:09 पर और सूर्यास्त 17:28 पर है। राहुकाल 16:11 से 17:28 तक है।

दिन और रात
दिन 07:09 – 17:28
रात 07:09 तक
तिथि
षष्ठी, 14:53 तक
सप्तमी
नक्षत्र
शतभिषा, 21:01 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 दिसंबर 2020 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 14:53 तक
शुक्ल सप्तमी 16:15, 21 दिस॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 21:01 तक
पूर्वा भाद्रपद 23:03, 21 दिस॰ तक
योग
वज्रअशुभ 12:01 तक
सिद्धि 11:51, 21 दिस॰ तक
करण
तैतिल 14:53 तक
गर 03:29, 21 दिस॰ तक
वणिज 16:15, 21 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:09
सूर्यास्त
17:28
चंद्रोदय
11:44
चंद्रास्त
23:12
दिनमान
10h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2077
शक संवत
1942, शार्वरी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:19 – 06:14
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
16:11 – 17:28
यमगंड
12:18 – 13:36
गुलिक काल
14:53 – 16:11

20 दिसंबर 2020 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:09 – 08:26टालें
चर08:26 – 09:44सामान्य
लाभ09:44 – 11:01शुभ
अमृत11:01 – 12:18शुभ
काल12:18 – 13:36टालें
शुभ13:36 – 14:53शुभ
रोग14:53 – 16:11टालें
उद्वेग16:11 – 17:28टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:28 – 19:11शुभ
अमृत19:11 – 20:53शुभ
चर20:53 – 22:36सामान्य
रोग22:36 – 00:19टालें
काल00:19 – 02:01टालें
लाभ02:01 – 03:44शुभ
उद्वेग03:44 – 05:27टालें
शुभ05:27 – 07:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:0908:00दिन
शुक्र08:0008:52दिन
बुध08:5209:44दिन
चंद्र09:4410:35दिन
शनि10:3511:27दिन
गुरु11:2712:18दिन
मंगल12:1813:10दिन
सूर्य13:1014:02दिन
शुक्र14:0214:53दिन
बुध14:5315:45दिन
चंद्र15:4516:36दिन
शनि16:3617:28दिन
गुरु17:2818:36रात
मंगल18:3619:45रात
सूर्य19:4520:53रात
शुक्र20:5322:02रात
बुध22:0223:10रात
चंद्र23:1000:19रात
शनि00:1901:27रात
गुरु01:2702:35रात
मंगल02:3503:44रात
सूर्य03:4404:52रात
शुक्र04:5206:01रात
बुध06:0107:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 दिस॰ 2020शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 दिस॰ 2020प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 दिस॰ 2020मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
3 जन॰ 2021संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 जन॰ 2021कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 जन॰ 2021कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 जन॰ 2021प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 जन॰ 2021पौष अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2021मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
17 जन॰ 2021विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1500° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।