8 नवंबर 2022 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 8 नवंबर 2022, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 8 नवंबर 2022 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (16:32 तक), नक्षत्र भरणी (01:38, 9 नव॰ तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:38 पर और सूर्यास्त 17:31 पर है। राहुकाल 14:48 से 16:09 तक है।

दिन और रात
दिन 06:38 – 17:31
रात 06:38 तक
तिथि
पूर्णिमा, 16:32 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
भरणी, 01:38 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 नवंबर 2022 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
पूर्णिमा 16:32 तक
कृष्ण प्रतिपदा 17:17, 9 नव॰ तक
नक्षत्र
भरणी 01:38, 9 नव॰ तक
कृत्तिका 03:08, 10 नव॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 21:44 तक
वरीयान 21:17, 9 नव॰ तक
करण
बव 16:32 तक
बालव 04:51, 9 नव॰ तक
कौलव 17:17, 9 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:38
सूर्यास्त
17:31
चंद्रोदय
17:28
चंद्रास्त
06:17
दिनमान
10h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2079
शक संवत
1944, शुभकृत संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:26

अशुभ समय

राहुकाल
14:48 – 16:09
यमगंड
09:21 – 10:43
गुलिक काल
12:04 – 13:26

8 नवंबर 2022 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:38 – 07:59टालें
उद्वेग07:59 – 09:21टालें
चर09:21 – 10:43सामान्य
लाभ10:43 – 12:04शुभ
अमृत12:04 – 13:26शुभ
काल13:26 – 14:48टालें
शुभ14:48 – 16:09शुभ
रोग16:09 – 17:31टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:31 – 19:09टालें
लाभ19:09 – 20:48शुभ
उद्वेग20:48 – 22:26टालें
शुभ22:26 – 00:05शुभ
अमृत00:05 – 01:43शुभ
चर01:43 – 03:21सामान्य
रोग03:21 – 05:00टालें
काल05:00 – 06:38टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:3807:32दिन
सूर्य07:3208:26दिन
शुक्र08:2609:21दिन
बुध09:2110:15दिन
चंद्र10:1511:10दिन
शनि11:1012:04दिन
गुरु12:0412:59दिन
मंगल12:5913:53दिन
सूर्य13:5314:48दिन
शुक्र14:4815:42दिन
बुध15:4216:36दिन
चंद्र16:3617:31दिन
शनि17:3118:36रात
गुरु18:3619:42रात
मंगल19:4220:48रात
सूर्य20:4821:53रात
शुक्र21:5322:59रात
बुध22:5900:05रात
चंद्र00:0501:10रात
शनि01:1002:16रात
गुरु02:1603:21रात
मंगल03:2104:27रात
सूर्य04:2705:33रात
शुक्र05:3306:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 नव॰ 2022कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
12 नव॰ 2022संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 नव॰ 2022कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 नव॰ 2022वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2022कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 नव॰ 2022प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 नव॰ 2022मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
27 नव॰ 2022विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 दिस॰ 2022शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 दिस॰ 2022प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1763° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।