1 अगस्त 2023 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 1 अगस्त 2023, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 1 अगस्त 2023 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (00:01, 2 अग॰ तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (16:03 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:42 पर और सूर्यास्त 19:12 पर है। राहुकाल 15:49 से 17:31 तक है।

दिन और रात
दिन 05:42 – 19:12
रात 05:42 तक
तिथि
पूर्णिमा, 00:01 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 16:03 तक
श्रवण
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 अगस्त 2023 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
पूर्णिमा 00:01, 2 अग॰ तक
कृष्ण प्रतिपदा 20:06, 2 अग॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 12:58, 2 अग॰ तक
योग
प्रीति 18:52 तक
आयुष्मान 14:33, 2 अग॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:58 तक
बव 00:01, 2 अग॰ तक
बालव 10:03, 2 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:42
सूर्यास्त
19:12
चंद्रोदय
19:17
चंद्रास्त
04:42
दिनमान
13h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
अधिक श्रावण
विक्रम संवत
2080
शक संवत
1945, शोभकृत संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:18 – 05:00
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
15:49 – 17:31
यमगंड
09:04 – 10:46
गुलिक काल
12:27 – 14:08

1 अगस्त 2023 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:42 – 07:23टालें
उद्वेग07:23 – 09:04टालें
चर09:04 – 10:46सामान्य
लाभ10:46 – 12:27शुभ
अमृत12:27 – 14:08शुभ
काल14:08 – 15:49टालें
शुभ15:49 – 17:31शुभ
रोग17:31 – 19:12टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल19:12 – 20:31टालें
लाभ20:31 – 21:50शुभ
उद्वेग21:50 – 23:08टालें
शुभ23:08 – 00:27शुभ
अमृत00:27 – 01:46शुभ
चर01:46 – 03:05सामान्य
रोग03:05 – 04:24टालें
काल04:24 – 05:42टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:4206:49दिन
सूर्य06:4907:57दिन
शुक्र07:5709:04दिन
बुध09:0410:12दिन
चंद्र10:1211:19दिन
शनि11:1912:27दिन
गुरु12:2713:34दिन
मंगल13:3414:42दिन
सूर्य14:4215:49दिन
शुक्र15:4916:57दिन
बुध16:5718:04दिन
चंद्र18:0419:12दिन
शनि19:1220:04रात
गुरु20:0420:57रात
मंगल20:5721:50रात
सूर्य21:5022:42रात
शुक्र22:4223:35रात
बुध23:3500:27रात
चंद्र00:2701:20रात
शनि01:2002:12रात
गुरु02:1203:05रात
मंगल03:0503:57रात
सूर्य03:5704:50रात
शुक्र04:5005:42रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 अग॰ 2023अधिक श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
5 अग॰ 2023संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 अग॰ 2023कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 अग॰ 2023कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 अग॰ 2023प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 अग॰ 2023अधिक श्रावण अमावस्याअमावस्या
17 अग॰ 2023सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2023विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 अग॰ 2023शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 अग॰ 2023प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1865° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।