8 मई 2025 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 8 मई 2025, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 8 मई 2025 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (12:29 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (21:06 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:35 पर और सूर्यास्त 19:00 पर है। राहुकाल 13:58 से 15:39 तक है।

दिन और रात
दिन 05:35 – 19:00
रात 05:34 तक
तिथि
एकादशी, 12:29 तक
द्वादशी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 21:06 तक
हस्त
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 मई 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 12:29 तक
शुक्ल द्वादशी 14:56, 9 मई तक
नक्षत्र
हस्त 00:09, 10 मई तक
योग
हर्षण 01:56, 9 मई तक
वज्रअशुभ 02:57, 10 मई तक
करण
विष्टि (भद्रा) 12:29 तक
बव 01:41, 9 मई तक
बालव 14:56, 9 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:35
सूर्यास्त
19:00
चंद्रोदय
15:22
चंद्रास्त
03:03
दिनमान
13h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 04:52
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
13:58 – 15:39
यमगंड
05:35 – 07:15
गुलिक काल
08:56 – 10:37

8 मई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:35 – 07:15शुभ
रोग07:15 – 08:56टालें
उद्वेग08:56 – 10:37टालें
चर10:37 – 12:17सामान्य
लाभ12:17 – 13:58शुभ
अमृत13:58 – 15:39शुभ
काल15:39 – 17:19टालें
शुभ17:19 – 19:00शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:00 – 20:19शुभ
चर20:19 – 21:39सामान्य
रोग21:39 – 22:58टालें
काल22:58 – 00:17टालें
लाभ00:17 – 01:36शुभ
उद्वेग01:36 – 02:55टालें
शुभ02:55 – 04:15शुभ
अमृत04:15 – 05:34शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:3506:42दिन
मंगल06:4207:49दिन
सूर्य07:4908:56दिन
शुक्र08:5610:03दिन
बुध10:0311:10दिन
चंद्र11:1012:17दिन
शनि12:1713:24दिन
गुरु13:2414:32दिन
मंगल14:3215:39दिन
सूर्य15:3916:46दिन
शुक्र16:4617:53दिन
बुध17:5319:00दिन
चंद्र19:0019:53रात
शनि19:5320:46रात
गुरु20:4621:39रात
मंगल21:3922:31रात
सूर्य22:3123:24रात
शुक्र23:2400:17रात
बुध00:1701:10रात
चंद्र01:1002:03रात
शनि02:0302:55रात
गुरु02:5503:48रात
मंगल03:4804:41रात
सूर्य04:4105:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 मई 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 मई 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 मई 2025वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
15 मई 2025वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 मई 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 मई 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 मई 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 मई 2025ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
30 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 जून 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2112° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।