15 जून 2026 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 15 जून 2026, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 15 जून 2026 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (08:24 तक), नक्षत्र मृगशिरा (19:08 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 05:22 पर और सूर्यास्त 19:20 पर है। राहुकाल 07:07 से 08:52 तक है।

दिन और रात
दिन 05:22 – 19:20
रात 05:23 तक
तिथि
प्रतिपदा, 04:31 तक
नक्षत्र
मृगशिरा, 19:08 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 जून 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
अमावस्या 08:24 तक
शुक्ल प्रतिपदा 04:31, 16 जून तक
शुक्ल द्वितीया 00:52, 17 जून तक
नक्षत्र
आर्द्रा 16:12, 16 जून तक
योग
शूलअशुभ 08:55 तक
गंडअशुभ 04:39, 16 जून तक
वृद्धि 00:34, 17 जून तक
करण
नाग 08:24 तक
किंस्तुघ्न 18:26 तक
बव 04:31, 16 जून तक
बालव 14:39, 16 जून तक
चंद्र राशि
वृषभ 08:41 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:22
सूर्यास्त
19:20
चंद्रोदय
05:05
चंद्रास्त
19:58
दिनमान
13h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
अधिक ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:42
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:49

अशुभ समय

राहुकाल
07:07 – 08:52
यमगंड
10:36 – 12:21
गुलिक काल
14:06 – 15:50

15 जून 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:22 – 07:07शुभ
काल07:07 – 08:52टालें
शुभ08:52 – 10:36शुभ
रोग10:36 – 12:21टालें
उद्वेग12:21 – 14:06टालें
चर14:06 – 15:50सामान्य
लाभ15:50 – 17:35शुभ
अमृत17:35 – 19:20शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:20 – 20:35सामान्य
रोग20:35 – 21:51टालें
काल21:51 – 23:06टालें
लाभ23:06 – 00:21शुभ
उद्वेग00:21 – 01:37टालें
शुभ01:37 – 02:52शुभ
अमृत02:52 – 04:07शुभ
चर04:07 – 05:23सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2206:32दिन
शनि06:3207:42दिन
गुरु07:4208:52दिन
मंगल08:5210:02दिन
सूर्य10:0211:11दिन
शुक्र11:1112:21दिन
बुध12:2113:31दिन
चंद्र13:3114:41दिन
शनि14:4115:50दिन
गुरु15:5017:00दिन
मंगल17:0018:10दिन
सूर्य18:1019:20दिन
शुक्र19:2020:10रात
बुध20:1021:00रात
चंद्र21:0021:51रात
शनि21:5122:41रात
गुरु22:4123:31रात
मंगल23:3100:21रात
सूर्य00:2101:11रात
शुक्र01:1102:02रात
बुध02:0202:52रात
चंद्र02:5203:42रात
शनि03:4204:32रात
गुरु04:3205:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 जून 2026अधिक ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
15 जून 2026मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जून 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जून 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जून 2026ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
4 जुल॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 जुल॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जुल॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जुल॰ 2026आषाढ़ अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2266° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।