14 दिसंबर 2027 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 14 दिसंबर 2027, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 14 दिसंबर 2027 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (19:01 तक), नक्षत्र मृगशिरा (13:25 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 07:05 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 14:50 से 16:08 तक है।

दिन और रात
दिन 07:05 – 17:25
रात 07:05 तक
तिथि
प्रतिपदा, 19:01 तक
द्वितीया
नक्षत्र
मृगशिरा, 13:25 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 दिसंबर 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 19:01 तक
कृष्ण द्वितीया 16:13, 15 दिस॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 11:21, 15 दिस॰ तक
योग
शुभ 16:46 तक
शुक्ल 13:15, 15 दिस॰ तक
करण
बालव 08:22 तक
कौलव 19:01 तक
तैतिल 05:38, 15 दिस॰ तक
गर 16:13, 15 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:05
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
18:05
चंद्रास्त
07:41
दिनमान
10h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:15 – 06:10
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
14:50 – 16:08
यमगंड
09:40 – 10:57
गुलिक काल
12:15 – 13:33

14 दिसंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:05 – 08:22टालें
उद्वेग08:22 – 09:40टालें
चर09:40 – 10:57सामान्य
लाभ10:57 – 12:15शुभ
अमृत12:15 – 13:33शुभ
काल13:33 – 14:50टालें
शुभ14:50 – 16:08शुभ
रोग16:08 – 17:25टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:25 – 19:08टालें
लाभ19:08 – 20:50शुभ
उद्वेग20:50 – 22:33टालें
शुभ22:33 – 00:15शुभ
अमृत00:15 – 01:58शुभ
चर01:58 – 03:40सामान्य
रोग03:40 – 05:23टालें
काल05:23 – 07:05टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:0507:56दिन
सूर्य07:5608:48दिन
शुक्र08:4809:40दिन
बुध09:4010:32दिन
चंद्र10:3211:23दिन
शनि11:2312:15दिन
गुरु12:1513:07दिन
मंगल13:0713:58दिन
सूर्य13:5814:50दिन
शुक्र14:5015:42दिन
बुध15:4216:34दिन
चंद्र16:3417:25दिन
शनि17:2518:34रात
गुरु18:3419:42रात
मंगल19:4220:50रात
सूर्य20:5021:59रात
शुक्र21:5923:07रात
बुध23:0700:15रात
चंद्र00:1501:24रात
शनि01:2402:32रात
गुरु02:3203:40रात
मंगल03:4004:49रात
सूर्य04:4905:57रात
शुक्र05:5707:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 दिस॰ 2027धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 दिस॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 दिस॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 दिस॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
1 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 जन॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जन॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 जन॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2475° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।