18 दिसंबर 2028 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 18 दिसंबर 2028, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 18 दिसंबर 2028 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (06:44, 19 दिस॰ तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (07:53, 19 दिस॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 07:08 पर और सूर्यास्त 17:27 पर है। राहुकाल 08:25 से 09:43 तक है।

दिन और रात
दिन 07:08 – 17:27
रात 07:08 तक
तिथि
तृतीया, 06:44 तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 दिसंबर 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 06:44, 19 दिस॰ तक
शुक्ल चतुर्थी 07:45, 20 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 07:53, 19 दिस॰ तक
योग
ध्रुव 01:51, 19 दिस॰ तक
व्याघातअशुभ 01:21, 20 दिस॰ तक
करण
तैतिल 18:28 तक
गर 06:44, 19 दिस॰ तक
वणिज 19:10, 19 दिस॰ तक
चंद्र राशि
धनु 13:07 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:08
सूर्यास्त
17:27
चंद्रोदय
08:55
चंद्रास्त
19:44
दिनमान
10h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:18 – 06:13
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
08:25 – 09:43
यमगंड
11:00 – 12:17
गुलिक काल
13:35 – 14:52

18 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:08 – 08:25शुभ
काल08:25 – 09:43टालें
शुभ09:43 – 11:00शुभ
रोग11:00 – 12:17टालें
उद्वेग12:17 – 13:35टालें
चर13:35 – 14:52सामान्य
लाभ14:52 – 16:10शुभ
अमृत16:10 – 17:27शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:27 – 19:10सामान्य
रोग19:10 – 20:52टालें
काल20:52 – 22:35टालें
लाभ22:35 – 00:18शुभ
उद्वेग00:18 – 02:00टालें
शुभ02:00 – 03:43शुभ
अमृत03:43 – 05:26शुभ
चर05:26 – 07:08सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:0807:59दिन
शनि07:5908:51दिन
गुरु08:5109:43दिन
मंगल09:4310:34दिन
सूर्य10:3411:26दिन
शुक्र11:2612:17दिन
बुध12:1713:09दिन
चंद्र13:0914:01दिन
शनि14:0114:52दिन
गुरु14:5215:44दिन
मंगल15:4416:36दिन
सूर्य16:3617:27दिन
शुक्र17:2718:36रात
बुध18:3619:44रात
चंद्र19:4420:52रात
शनि20:5222:01रात
गुरु22:0123:09रात
मंगल23:0900:18रात
सूर्य00:1801:26रात
शुक्र01:2602:35रात
बुध02:3503:43रात
चंद्र03:4304:51रात
शनि04:5106:00रात
गुरु06:0007:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 दिस॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 दिस॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2617° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।