11 जनवरी 2030 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 11 जनवरी 2030, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 11 जनवरी 2030 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (08:48, 12 जन॰ तक), नक्षत्र रेवती (01:24, 12 जन॰ तक) और योग शिव है। सूर्योदय 07:15 पर और सूर्यास्त 17:43 पर है। राहुकाल 11:10 से 12:29 तक है।

दिन और रात
दिन 07:15 – 17:43
रात 07:15 तक
तिथि
अष्टमी
नक्षत्र
रेवती, 01:24 तक
अश्विनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 जनवरी 2030 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 08:48, 12 जन॰ तक
नक्षत्र
रेवती 01:24, 12 जन॰ तक
अश्विनी 04:22, 13 जन॰ तक
योग
शिव 00:06, 12 जन॰ तक
सिद्ध 00:56, 13 जन॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 19:36 तक
बव 08:48, 12 जन॰ तक
चंद्र राशि
मीन 01:24, 12 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:15
सूर्यास्त
17:43
चंद्रोदय
11:29
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
10h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:26 – 06:20
अभिजीत मुहूर्त
12:08 – 12:50

अशुभ समय

राहुकाल
11:10 – 12:29
यमगंड
15:06 – 16:24
गुलिक काल
08:33 – 09:52

11 जनवरी 2030 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:15 – 08:33सामान्य
लाभ08:33 – 09:52शुभ
अमृत09:52 – 11:10शुभ
काल11:10 – 12:29टालें
शुभ12:29 – 13:47शुभ
रोग13:47 – 15:06टालें
उद्वेग15:06 – 16:24टालें
चर16:24 – 17:43सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:43 – 19:24टालें
काल19:24 – 21:06टालें
लाभ21:06 – 22:47शुभ
उद्वेग22:47 – 00:29टालें
शुभ00:29 – 02:10शुभ
अमृत02:10 – 03:52शुभ
चर03:52 – 05:33सामान्य
रोग05:33 – 07:15टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:1508:07दिन
बुध08:0708:59दिन
चंद्र08:5909:52दिन
शनि09:5210:44दिन
गुरु10:4411:36दिन
मंगल11:3612:29दिन
सूर्य12:2913:21दिन
शुक्र13:2114:13दिन
बुध14:1315:06दिन
चंद्र15:0615:58दिन
शनि15:5816:50दिन
गुरु16:5017:43दिन
मंगल17:4318:50रात
सूर्य18:5019:58रात
शुक्र19:5821:06रात
बुध21:0622:13रात
चंद्र22:1323:21रात
शनि23:2100:29रात
गुरु00:2901:36रात
मंगल01:3602:44रात
सूर्य02:4403:52रात
शुक्र03:5204:59रात
बुध04:5906:07रात
चंद्र06:0707:15रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जन॰ 2030मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2030शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 जन॰ 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 जन॰ 2030पौष पूर्णिमापूर्णिमा
23 जन॰ 2030संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जन॰ 2030कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जन॰ 2030कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2030माघ अमावस्याअमावस्या
6 फ़र॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2765° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।