13 मई 2030 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 13 मई 2030, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 13 मई 2030 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (08:33 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (06:00 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:31 पर और सूर्यास्त 19:03 पर है। राहुकाल 07:13 से 08:54 तक है।

दिन और रात
दिन 05:31 – 19:03
रात 05:31 तक
तिथि
दशमी, 08:33 तक
एकादशी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 04:39 तक
हस्त
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 मई 2030 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल दशमी 08:33 तक
शुक्ल एकादशी 06:21, 14 मई तक
नक्षत्र
हस्त 02:40, 15 मई तक
योग
हर्षण 01:04, 14 मई तक
वज्रअशुभ 21:48, 14 मई तक
करण
गर 08:33 तक
वणिज 19:32 तक
विष्टि (भद्रा) 06:21, 14 मई तक
चंद्र राशि
सिंह 11:44 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:31
सूर्यास्त
19:03
चंद्रोदय
14:41
चंद्रास्त
02:07
दिनमान
13h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2087
शक संवत
1952, साधारण संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:07 – 04:49
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
07:13 – 08:54
यमगंड
10:36 – 12:17
गुलिक काल
13:59 – 15:40

13 मई 2030 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:31 – 07:13शुभ
काल07:13 – 08:54टालें
शुभ08:54 – 10:36शुभ
रोग10:36 – 12:17टालें
उद्वेग12:17 – 13:59टालें
चर13:59 – 15:40सामान्य
लाभ15:40 – 17:22शुभ
अमृत17:22 – 19:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:03 – 20:22सामान्य
रोग20:22 – 21:40टालें
काल21:40 – 22:58टालें
लाभ22:58 – 00:17शुभ
उद्वेग00:17 – 01:35टालें
शुभ01:35 – 02:54शुभ
अमृत02:54 – 04:12शुभ
चर04:12 – 05:31सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3106:39दिन
शनि06:3907:47दिन
गुरु07:4708:54दिन
मंगल08:5410:02दिन
सूर्य10:0211:10दिन
शुक्र11:1012:17दिन
बुध12:1713:25दिन
चंद्र13:2514:33दिन
शनि14:3315:40दिन
गुरु15:4016:48दिन
मंगल16:4817:55दिन
सूर्य17:5519:03दिन
शुक्र19:0319:55रात
बुध19:5520:48रात
चंद्र20:4821:40रात
शनि21:4022:32रात
गुरु22:3223:25रात
मंगल23:2500:17रात
सूर्य00:1701:09रात
शुक्र01:0902:01रात
बुध02:0102:54रात
चंद्र02:5403:46रात
शनि03:4604:38रात
गुरु04:3805:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 मई 2030शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
15 मई 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 मई 2030वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
17 मई 2030वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
20 मई 2030संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
24 मई 2030कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
27 मई 2030कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
29 मई 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
1 जून 2030ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
5 जून 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2812° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।