23 जून 2030 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 23 जून 2030, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 23 जून 2030 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (11:21 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (17:25 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:24 पर और सूर्यास्त 19:22 पर है। राहुकाल 17:37 से 19:22 तक है।

दिन और रात
दिन 05:24 – 19:22
रात 05:24 तक
तिथि
अष्टमी, 11:21 तक
नवमी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 17:25 तक
रेवती
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 जून 2030 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 11:21 तक
कृष्ण नवमी 12:55, 24 जून तक
नक्षत्र
रेवती 19:45, 24 जून तक
योग
सौभाग्य 15:22 तक
शोभन 15:44, 24 जून तक
करण
कौलव 11:21 तक
तैतिल 00:04, 24 जून तक
गर 12:55, 24 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:24
सूर्यास्त
19:22
चंद्रोदय
00:04
चंद्रास्त
12:56
दिनमान
13h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2087
शक संवत
1952, साधारण संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:04 – 04:44
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
17:37 – 19:22
यमगंड
12:23 – 14:08
गुलिक काल
15:52 – 17:37

23 जून 2030 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:24 – 07:09टालें
चर07:09 – 08:53सामान्य
लाभ08:53 – 10:38शुभ
अमृत10:38 – 12:23शुभ
काल12:23 – 14:08टालें
शुभ14:08 – 15:52शुभ
रोग15:52 – 17:37टालें
उद्वेग17:37 – 19:22टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:22 – 20:37शुभ
अमृत20:37 – 21:52शुभ
चर21:52 – 23:08सामान्य
रोग23:08 – 00:23टालें
काल00:23 – 01:38टालें
लाभ01:38 – 02:54शुभ
उद्वेग02:54 – 04:09टालें
शुभ04:09 – 05:24शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2406:34दिन
शुक्र06:3407:44दिन
बुध07:4408:53दिन
चंद्र08:5310:03दिन
शनि10:0311:13दिन
गुरु11:1312:23दिन
मंगल12:2313:33दिन
सूर्य13:3314:43दिन
शुक्र14:4315:52दिन
बुध15:5217:02दिन
चंद्र17:0218:12दिन
शनि18:1219:22दिन
गुरु19:2220:12रात
मंगल20:1221:02रात
सूर्य21:0221:52रात
शुक्र21:5222:43रात
बुध22:4323:33रात
चंद्र23:3300:23रात
शनि00:2301:13रात
गुरु01:1302:03रात
मंगल02:0302:54रात
सूर्य02:5403:44रात
शुक्र03:4404:34रात
बुध04:3405:24रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 जून 2030कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 जून 2030कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 जून 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 जून 2030आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
5 जुल॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 जुल॰ 2030शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 जुल॰ 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 जुल॰ 2030आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
17 जुल॰ 2030कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2030संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 जुल॰ 2030कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2828° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।