11 अगस्त 2030 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 11 अगस्त 2030, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 11 अगस्त 2030 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (20:49 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (14:03 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 19:04 पर है। राहुकाल 17:24 से 19:04 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 19:04
रात 05:48 तक
तिथि
त्रयोदशी, 20:49 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 14:03 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 अगस्त 2030 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 20:49 तक
शुक्ल चतुर्दशी 18:24, 12 अग॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 12:21, 12 अग॰ तक
योग
प्रीति 22:44 तक
आयुष्मान 19:42, 12 अग॰ तक
करण
कौलव 10:06 तक
तैतिल 20:49 तक
गर 07:35, 12 अग॰ तक
चंद्र राशि
धनु 19:37 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
19:04
चंद्रोदय
17:20
चंद्रास्त
03:18
दिनमान
13h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2087
शक संवत
1952, साधारण संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:22 – 05:05
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:52

अशुभ समय

राहुकाल
17:24 – 19:04
यमगंड
12:26 – 14:05
गुलिक काल
15:45 – 17:24

11 अगस्त 2030 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:48 – 07:27टालें
चर07:27 – 09:07सामान्य
लाभ09:07 – 10:46शुभ
अमृत10:46 – 12:26शुभ
काल12:26 – 14:05टालें
शुभ14:05 – 15:45शुभ
रोग15:45 – 17:24टालें
उद्वेग17:24 – 19:04टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:04 – 20:24शुभ
अमृत20:24 – 21:45शुभ
चर21:45 – 23:05सामान्य
रोग23:05 – 00:26टालें
काल00:26 – 01:47टालें
लाभ01:47 – 03:07शुभ
उद्वेग03:07 – 04:28टालें
शुभ04:28 – 05:48शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4806:54दिन
शुक्र06:5408:00दिन
बुध08:0009:07दिन
चंद्र09:0710:13दिन
शनि10:1311:19दिन
गुरु11:1912:26दिन
मंगल12:2613:32दिन
सूर्य13:3214:38दिन
शुक्र14:3815:45दिन
बुध15:4516:51दिन
चंद्र16:5117:57दिन
शनि17:5719:04दिन
गुरु19:0419:57रात
मंगल19:5720:51रात
सूर्य20:5121:45रात
शुक्र21:4522:39रात
बुध22:3923:32रात
चंद्र23:3200:26रात
शनि00:2601:20रात
गुरु01:2002:13रात
मंगल02:1303:07रात
सूर्य03:0704:01रात
शुक्र04:0104:55रात
बुध04:5505:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 अग॰ 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 अग॰ 2030श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
17 अग॰ 2030संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 अग॰ 2030सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2030कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 अग॰ 2030कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 अग॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 अग॰ 2030भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
1 सित॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 सित॰ 2030शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 सित॰ 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2846° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।