27 दिसंबर 2030 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 27 दिसंबर 2030, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 27 दिसंबर 2030 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (12:41 तक), नक्षत्र श्रवण (22:40 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 07:12 पर और सूर्यास्त 17:32 पर है। राहुकाल 11:04 से 12:22 तक है।

दिन और रात
दिन 07:12 – 17:32
रात 07:12 तक
तिथि
तृतीया, 12:41 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
श्रवण, 22:40 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 दिसंबर 2030 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 12:41 तक
शुक्ल चतुर्थी 10:06, 28 दिस॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 22:40 तक
धनिष्ठा 21:06, 28 दिस॰ तक
योग
हर्षण 01:13, 28 दिस॰ तक
वज्रअशुभ 22:12, 28 दिस॰ तक
करण
गर 12:41 तक
वणिज 23:19 तक
विष्टि (भद्रा) 10:06, 28 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:12
सूर्यास्त
17:32
चंद्रोदय
09:11
चंद्रास्त
20:40
दिनमान
10h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2087
शक संवत
1952, साधारण संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:22 – 06:17
अभिजीत मुहूर्त
12:01 – 12:42

अशुभ समय

राहुकाल
11:04 – 12:22
यमगंड
14:57 – 16:14
गुलिक काल
08:29 – 09:47

27 दिसंबर 2030 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:12 – 08:29सामान्य
लाभ08:29 – 09:47शुभ
अमृत09:47 – 11:04शुभ
काल11:04 – 12:22टालें
शुभ12:22 – 13:39शुभ
रोग13:39 – 14:57टालें
उद्वेग14:57 – 16:14टालें
चर16:14 – 17:32सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:32 – 19:14टालें
काल19:14 – 20:57टालें
लाभ20:57 – 22:39शुभ
उद्वेग22:39 – 00:22टालें
शुभ00:22 – 02:04शुभ
अमृत02:04 – 03:47शुभ
चर03:47 – 05:29सामान्य
रोग05:29 – 07:12टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:1208:03दिन
बुध08:0308:55दिन
चंद्र08:5509:47दिन
शनि09:4710:38दिन
गुरु10:3811:30दिन
मंगल11:3012:22दिन
सूर्य12:2213:13दिन
शुक्र13:1314:05दिन
बुध14:0514:57दिन
चंद्र14:5715:48दिन
शनि15:4816:40दिन
गुरु16:4017:32दिन
मंगल17:3218:40रात
सूर्य18:4019:48रात
शुक्र19:4820:57रात
बुध20:5722:05रात
चंद्र22:0523:13रात
शनि23:1300:22रात
गुरु00:2201:30रात
मंगल01:3002:39रात
सूर्य02:3903:47रात
शुक्र03:4704:55रात
बुध04:5506:04रात
चंद्र06:0407:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 दिस॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
4 जन॰ 2031शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
6 जन॰ 2031प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 जन॰ 2031पौष पूर्णिमापूर्णिमा
12 जन॰ 2031संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 जन॰ 2031मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2031कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
19 जन॰ 2031कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 जन॰ 2031प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 जन॰ 2031माघ अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2899° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।