10 जुलाई 2031 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 10 जुलाई 2031, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 10 जुलाई 2031 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (06:17 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (02:35, 11 जुल॰ तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:30 पर और सूर्यास्त 19:22 पर है। राहुकाल 14:10 से 15:54 तक है।

दिन और रात
दिन 05:30 – 19:22
रात 05:31 तक
तिथि
सप्तमी, 05:26 तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 02:35 तक
रेवती
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 जुलाई 2031 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 06:17 तक
कृष्ण सप्तमी 05:26, 11 जुल॰ तक
कृष्ण अष्टमी 05:24, 12 जुल॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 02:35, 11 जुल॰ तक
रेवती 03:10, 12 जुल॰ तक
योग
शोभन 19:38 तक
अतिगंडअशुभ 18:19, 11 जुल॰ तक
करण
वणिज 06:17 तक
विष्टि (भद्रा) 17:46 तक
बव 05:26, 11 जुल॰ तक
बालव 17:19, 11 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:30
सूर्यास्त
19:22
चंद्रोदय
23:19
चंद्रास्त
11:21
दिनमान
13h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2088
शक संवत
1953, विरोधकृत संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 04:50
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
14:10 – 15:54
यमगंड
05:30 – 07:14
गुलिक काल
08:58 – 10:42

10 जुलाई 2031 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:30 – 07:14शुभ
रोग07:14 – 08:58टालें
उद्वेग08:58 – 10:42टालें
चर10:42 – 12:26सामान्य
लाभ12:26 – 14:10शुभ
अमृत14:10 – 15:54शुभ
काल15:54 – 17:38टालें
शुभ17:38 – 19:22शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:22 – 20:38शुभ
चर20:38 – 21:54सामान्य
रोग21:54 – 23:10टालें
काल23:10 – 00:26टालें
लाभ00:26 – 01:42शुभ
उद्वेग01:42 – 02:58टालें
शुभ02:58 – 04:15शुभ
अमृत04:15 – 05:31शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:3006:39दिन
मंगल06:3907:49दिन
सूर्य07:4908:58दिन
शुक्र08:5810:07दिन
बुध10:0711:17दिन
चंद्र11:1712:26दिन
शनि12:2613:35दिन
गुरु13:3514:45दिन
मंगल14:4515:54दिन
सूर्य15:5417:03दिन
शुक्र17:0318:12दिन
बुध18:1219:22दिन
चंद्र19:2220:12रात
शनि20:1221:03रात
गुरु21:0321:54रात
मंगल21:5422:45रात
सूर्य22:4523:35रात
शुक्र23:3500:26रात
बुध00:2601:17रात
चंद्र01:1702:08रात
शनि02:0802:58रात
गुरु02:5803:49रात
मंगल03:4904:40रात
सूर्य04:4005:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 जुल॰ 2031कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 जुल॰ 2031कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 जुल॰ 2031प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 जुल॰ 2031कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुल॰ 2031श्रावण अमावस्याअमावस्या
23 जुल॰ 2031विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 जुल॰ 2031शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अग॰ 2031प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अग॰ 2031श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
6 अग॰ 2031संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2974° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।