15 फ़रवरी 2032 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 15 फ़रवरी 2032, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 15 फ़रवरी 2032 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (21:25 तक), नक्षत्र रेवती (17:32 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 07:00 पर और सूर्यास्त 18:10 पर है। राहुकाल 16:47 से 18:10 तक है।

दिन और रात
दिन 07:00 – 18:10
रात 06:59 तक
तिथि
पंचमी, 21:25 तक
षष्ठी
नक्षत्र
रेवती, 17:32 तक
अश्विनी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 फ़रवरी 2032 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 21:25 तक
शुक्ल षष्ठी 20:36, 16 फ़र॰ तक
नक्षत्र
रेवती 17:32 तक
अश्विनी 17:14, 16 फ़र॰ तक
योग
शुभ 01:05, 16 फ़र॰ तक
शुक्ल 23:21, 16 फ़र॰ तक
करण
बव 10:09 तक
बालव 21:25 तक
कौलव 08:54, 16 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मीन 17:32 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:00
सूर्यास्त
18:10
चंद्रोदय
09:31
चंद्रास्त
22:44
दिनमान
11h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2088
शक संवत
1953, विरोधकृत संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:17 – 06:08
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
16:47 – 18:10
यमगंड
12:35 – 13:59
गुलिक काल
15:23 – 16:47

15 फ़रवरी 2032 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:00 – 08:23टालें
चर08:23 – 09:47सामान्य
लाभ09:47 – 11:11शुभ
अमृत11:11 – 12:35शुभ
काल12:35 – 13:59टालें
शुभ13:59 – 15:23शुभ
रोग15:23 – 16:47टालें
उद्वेग16:47 – 18:10टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:10 – 19:46शुभ
अमृत19:46 – 21:22शुभ
चर21:22 – 22:59सामान्य
रोग22:59 – 00:35टालें
काल00:35 – 02:11टालें
लाभ02:11 – 03:47शुभ
उद्वेग03:47 – 05:23टालें
शुभ05:23 – 06:59शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:0007:55दिन
शुक्र07:5508:51दिन
बुध08:5109:47दिन
चंद्र09:4710:43दिन
शनि10:4311:39दिन
गुरु11:3912:35दिन
मंगल12:3513:31दिन
सूर्य13:3114:27दिन
शुक्र14:2715:23दिन
बुध15:2316:19दिन
चंद्र16:1917:15दिन
शनि17:1518:10दिन
गुरु18:1019:14रात
मंगल19:1420:18रात
सूर्य20:1821:22रात
शुक्र21:2222:27रात
बुध22:2723:31रात
चंद्र23:3100:35रात
शनि00:3501:39रात
गुरु01:3902:43रात
मंगल02:4303:47रात
सूर्य03:4704:51रात
शुक्र04:5105:55रात
बुध05:5506:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 फ़र॰ 2032शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 फ़र॰ 2032प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 फ़र॰ 2032माघ पूर्णिमापूर्णिमा
1 मार्च 2032संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 मार्च 2032कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 मार्च 2032कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 मार्च 2032प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 मार्च 2032फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
14 मार्च 2032मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्च 2032विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3058° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।