3 अप्रैल 2032 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 3 अप्रैल 2032, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 3 अप्रैल 2032 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (02:39, 4 अप्रैल तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (03:11, 4 अप्रैल तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 06:08 पर और सूर्यास्त 18:40 पर है। राहुकाल 09:16 से 10:50 तक है।

दिन और रात
दिन 06:08 – 18:40
रात 06:07 तक
तिथि
अष्टमी, 02:39 तक
नवमी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 03:11 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 अप्रैल 2032 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 02:39, 4 अप्रैल तक
कृष्ण नवमी 00:22, 5 अप्रैल तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 03:11, 4 अप्रैल तक
उत्तराषाढ़ा 01:38, 5 अप्रैल तक
योग
परिघअशुभ 21:17 तक
शिव 18:22, 4 अप्रैल तक
करण
बालव 15:40 तक
कौलव 02:39, 4 अप्रैल तक
तैतिल 13:33, 4 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:08
सूर्यास्त
18:40
चंद्रोदय
00:41
चंद्रास्त
11:40
दिनमान
12h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2088
शक संवत
1953, विरोधकृत संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:36 – 05:22
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:49

अशुभ समय

राहुकाल
09:16 – 10:50
यमगंड
13:58 – 15:32
गुलिक काल
06:08 – 07:42

3 अप्रैल 2032 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:08 – 07:42टालें
शुभ07:42 – 09:16शुभ
रोग09:16 – 10:50टालें
उद्वेग10:50 – 12:24टालें
चर12:24 – 13:58सामान्य
लाभ13:58 – 15:32शुभ
अमृत15:32 – 17:06शुभ
काल17:06 – 18:40टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:40 – 20:06शुभ
उद्वेग20:06 – 21:32टालें
शुभ21:32 – 22:58शुभ
अमृत22:58 – 00:23शुभ
चर00:23 – 01:49सामान्य
रोग01:49 – 03:15टालें
काल03:15 – 04:41टालें
लाभ04:41 – 06:07शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0807:11दिन
गुरु07:1108:13दिन
मंगल08:1309:16दिन
सूर्य09:1610:19दिन
शुक्र10:1911:21दिन
बुध11:2112:24दिन
चंद्र12:2413:27दिन
शनि13:2714:29दिन
गुरु14:2915:32दिन
मंगल15:3216:35दिन
सूर्य16:3517:37दिन
शुक्र17:3718:40दिन
बुध18:4019:37रात
चंद्र19:3720:34रात
शनि20:3421:32रात
गुरु21:3222:29रात
मंगल22:2923:26रात
सूर्य23:2600:23रात
शुक्र00:2301:21रात
बुध01:2102:18रात
चंद्र02:1803:15रात
शनि03:1504:13रात
गुरु04:1305:10रात
मंगल05:1006:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 अप्रैल 2032कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अप्रैल 2032कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अप्रैल 2032प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अप्रैल 2032चैत्र अमावस्याअमावस्या
13 अप्रैल 2032विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 अप्रैल 2032मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
21 अप्रैल 2032शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 अप्रैल 2032प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 अप्रैल 2032चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
29 अप्रैल 2032संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3076° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।