11 जुलाई 2032 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 11 जुलाई 2032, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 11 जुलाई 2032 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (04:41, 12 जुल॰ तक), नक्षत्र मघा (03:36, 12 जुल॰ तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:31 पर और सूर्यास्त 19:21 पर है। राहुकाल 17:38 से 19:21 तक है।

दिन और रात
दिन 05:31 – 19:21
रात 05:31 तक
तिथि
चतुर्थी, 04:41 तक
नक्षत्र
मघा, 03:36 तक
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 जुलाई 2032 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 04:41, 12 जुल॰ तक
शुक्ल पंचमी 07:09, 13 जुल॰ तक
नक्षत्र
मघा 03:36, 12 जुल॰ तक
पूर्वा फाल्गुनी 06:37, 13 जुल॰ तक
योग
सिद्धि 16:39 तक
व्यतीपातअशुभ 17:41, 12 जुल॰ तक
करण
वणिज 15:27 तक
विष्टि (भद्रा) 04:41, 12 जुल॰ तक
बव 17:56, 12 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:31
सूर्यास्त
19:21
चंद्रोदय
08:41
चंद्रास्त
21:32
दिनमान
13h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2089
शक संवत
1954, परिधावी संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 04:50
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
17:38 – 19:21
यमगंड
12:26 – 14:10
गुलिक काल
15:54 – 17:38

11 जुलाई 2032 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:31 – 07:15टालें
चर07:15 – 08:59सामान्य
लाभ08:59 – 10:42शुभ
अमृत10:42 – 12:26शुभ
काल12:26 – 14:10टालें
शुभ14:10 – 15:54शुभ
रोग15:54 – 17:38टालें
उद्वेग17:38 – 19:21टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:21 – 20:38शुभ
अमृत20:38 – 21:54शुभ
चर21:54 – 23:10सामान्य
रोग23:10 – 00:26टालें
काल00:26 – 01:43टालें
लाभ01:43 – 02:59शुभ
उद्वेग02:59 – 04:15टालें
शुभ04:15 – 05:31शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3106:40दिन
शुक्र06:4007:49दिन
बुध07:4908:59दिन
चंद्र08:5910:08दिन
शनि10:0811:17दिन
गुरु11:1712:26दिन
मंगल12:2613:35दिन
सूर्य13:3514:45दिन
शुक्र14:4515:54दिन
बुध15:5417:03दिन
चंद्र17:0318:12दिन
शनि18:1219:21दिन
गुरु19:2120:12रात
मंगल20:1221:03रात
सूर्य21:0321:54रात
शुक्र21:5422:45रात
बुध22:4523:36रात
चंद्र23:3600:26रात
शनि00:2601:17रात
गुरु01:1702:08रात
मंगल02:0802:59रात
सूर्य02:5903:50रात
शुक्र03:5004:41रात
बुध04:4105:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 जुल॰ 2032विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 जुल॰ 2032कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुल॰ 2032शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
21 जुल॰ 2032प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जुल॰ 2032आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
26 जुल॰ 2032संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 जुल॰ 2032कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 अग॰ 2032कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 अग॰ 2032प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 अग॰ 2032श्रावण अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3114° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।