10 अगस्त 2032 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 10 अगस्त 2032, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 10 अगस्त 2032 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (20:22 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (15:54 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:47 पर और सूर्यास्त 19:04 पर है। राहुकाल 15:45 से 17:25 तक है।

दिन और रात
दिन 05:47 – 19:04
रात 05:48 तक
तिथि
चतुर्थी, 20:22 तक
पंचमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 15:54 तक
हस्त
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 अगस्त 2032 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 20:22 तक
शुक्ल पंचमी 22:27, 11 अग॰ तक
नक्षत्र
हस्त 18:38, 11 अग॰ तक
योग
सिद्ध 03:01, 11 अग॰ तक
साध्य 03:38, 12 अग॰ तक
करण
वणिज 07:12 तक
विष्टि (भद्रा) 20:22 तक
बव 09:27, 11 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:47
सूर्यास्त
19:04
चंद्रोदय
09:10
चंद्रास्त
21:13
दिनमान
13h 17m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2089
शक संवत
1954, परिधावी संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:22 – 05:05
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:52

अशुभ समय

राहुकाल
15:45 – 17:25
यमगंड
09:07 – 10:46
गुलिक काल
12:26 – 14:05

10 अगस्त 2032 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:47 – 07:27टालें
उद्वेग07:27 – 09:07टालें
चर09:07 – 10:46सामान्य
लाभ10:46 – 12:26शुभ
अमृत12:26 – 14:05शुभ
काल14:05 – 15:45टालें
शुभ15:45 – 17:25शुभ
रोग17:25 – 19:04टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल19:04 – 20:25टालें
लाभ20:25 – 21:45शुभ
उद्वेग21:45 – 23:06टालें
शुभ23:06 – 00:26शुभ
अमृत00:26 – 01:47शुभ
चर01:47 – 03:07सामान्य
रोग03:07 – 04:27टालें
काल04:27 – 05:48टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:4706:54दिन
सूर्य06:5408:00दिन
शुक्र08:0009:07दिन
बुध09:0710:13दिन
चंद्र10:1311:19दिन
शनि11:1912:26दिन
गुरु12:2613:32दिन
मंगल13:3214:39दिन
सूर्य14:3915:45दिन
शुक्र15:4516:51दिन
बुध16:5117:58दिन
चंद्र17:5819:04दिन
शनि19:0419:58रात
गुरु19:5820:51रात
मंगल20:5121:45रात
सूर्य21:4522:39रात
शुक्र22:3923:32रात
बुध23:3200:26रात
चंद्र00:2601:20रात
शनि01:2002:13रात
गुरु02:1303:07रात
मंगल03:0704:01रात
सूर्य04:0104:54रात
शुक्र04:5405:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अग॰ 2032विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 अग॰ 2032सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
17 अग॰ 2032शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 अग॰ 2032प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 अग॰ 2032श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
24 अग॰ 2032संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 अग॰ 2032कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 अग॰ 2032कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 सित॰ 2032प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 सित॰ 2032भाद्रपद अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3126° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।