1 अक्टूबर 2032 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2032, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2032 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (12:01 तक), नक्षत्र मघा (22:10 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:14 पर और सूर्यास्त 18:06 पर है। राहुकाल 10:41 से 12:10 तक है।

दिन और रात
दिन 06:14 – 18:06
रात 06:14 तक
तिथि
द्वादशी, 12:01 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
मघा, 22:10 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 अक्टूबर 2032 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 12:01 तक
कृष्ण त्रयोदशी 14:30, 2 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मघा 22:10 तक
पूर्वा फाल्गुनी 01:07, 3 अक्टू॰ तक
योग
साध्य 13:19 तक
शुभ 14:14, 2 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 12:01 तक
गर 01:16, 2 अक्टू॰ तक
वणिज 14:30, 2 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:14
सूर्यास्त
18:06
चंद्रोदय
03:19
चंद्रास्त
16:10
दिनमान
11h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2089
शक संवत
1954, परिधावी संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:37 – 05:25
अभिजीत मुहूर्त
11:46 – 12:34

अशुभ समय

राहुकाल
10:41 – 12:10
यमगंड
15:08 – 16:37
गुलिक काल
07:43 – 09:12

1 अक्टूबर 2032 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:14 – 07:43सामान्य
लाभ07:43 – 09:12शुभ
अमृत09:12 – 10:41शुभ
काल10:41 – 12:10टालें
शुभ12:10 – 13:39शुभ
रोग13:39 – 15:08टालें
उद्वेग15:08 – 16:37टालें
चर16:37 – 18:06सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:06 – 19:37टालें
काल19:37 – 21:08टालें
लाभ21:08 – 22:39शुभ
उद्वेग22:39 – 00:10टालें
शुभ00:10 – 01:41शुभ
अमृत01:41 – 03:12शुभ
चर03:12 – 04:43सामान्य
रोग04:43 – 06:14टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:1407:13दिन
बुध07:1308:12दिन
चंद्र08:1209:12दिन
शनि09:1210:11दिन
गुरु10:1111:11दिन
मंगल11:1112:10दिन
सूर्य12:1013:09दिन
शुक्र13:0914:09दिन
बुध14:0915:08दिन
चंद्र15:0816:07दिन
शनि16:0717:07दिन
गुरु17:0718:06दिन
मंगल18:0619:07रात
सूर्य19:0720:08रात
शुक्र20:0821:08रात
बुध21:0822:09रात
चंद्र22:0923:10रात
शनि23:1000:10रात
गुरु00:1001:11रात
मंगल01:1102:12रात
सूर्य02:1203:12रात
शुक्र03:1204:13रात
बुध04:1305:14रात
चंद्र05:1406:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 अक्टू॰ 2032प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 अक्टू॰ 2032आश्विन अमावस्याअमावस्या
8 अक्टू॰ 2032विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 अक्टू॰ 2032शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2032प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2032तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2032आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
22 अक्टू॰ 2032संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
26 अक्टू॰ 2032कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 अक्टू॰ 2032कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3146° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।