5 जनवरी 2034 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 5 जनवरी 2034, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 5 जनवरी 2034 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (23:51 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (00:10, 6 जन॰ तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 07:14 पर और सूर्यास्त 17:38 पर है। राहुकाल 13:44 से 15:02 तक है।

दिन और रात
दिन 07:14 – 17:38
रात 07:14 तक
तिथि
प्रतिपदा, 23:51 तक
द्वितीया
नक्षत्र
पुनर्वसु, 00:10 तक
पुष्य
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 जनवरी 2034 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 23:51 तक
कृष्ण द्वितीया 23:01, 6 जन॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 00:10, 6 जन॰ तक
पुष्य 23:59, 6 जन॰ तक
योग
इंद्र 11:25 तक
वैधृतिअशुभ 09:15, 6 जन॰ तक
करण
बालव 12:30 तक
कौलव 23:51 तक
तैतिल 11:21, 6 जन॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 18:19 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:14
सूर्यास्त
17:38
चंद्रोदय
18:25
चंद्रास्त
07:15
दिनमान
10h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2090
शक संवत
1955, प्रमादी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:25 – 06:20
अभिजीत मुहूर्त
12:05 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
13:44 – 15:02
यमगंड
07:14 – 08:32
गुलिक काल
09:50 – 11:08

5 जनवरी 2034 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:14 – 08:32शुभ
रोग08:32 – 09:50टालें
उद्वेग09:50 – 11:08टालें
चर11:08 – 12:26सामान्य
लाभ12:26 – 13:44शुभ
अमृत13:44 – 15:02शुभ
काल15:02 – 16:20टालें
शुभ16:20 – 17:38शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:38 – 19:20शुभ
चर19:20 – 21:02सामान्य
रोग21:02 – 22:44टालें
काल22:44 – 00:26टालें
लाभ00:26 – 02:08शुभ
उद्वेग02:08 – 03:50टालें
शुभ03:50 – 05:32शुभ
अमृत05:32 – 07:14शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:1408:06दिन
मंगल08:0608:58दिन
सूर्य08:5809:50दिन
शुक्र09:5010:42दिन
बुध10:4211:34दिन
चंद्र11:3412:26दिन
शनि12:2613:18दिन
गुरु13:1814:10दिन
मंगल14:1015:02दिन
सूर्य15:0215:54दिन
शुक्र15:5416:46दिन
बुध16:4617:38दिन
चंद्र17:3818:46रात
शनि18:4619:54रात
गुरु19:5421:02रात
मंगल21:0222:10रात
सूर्य22:1023:18रात
शुक्र23:1800:26रात
बुध00:2601:34रात
चंद्र01:3402:42रात
शनि02:4203:50रात
गुरु03:5004:58रात
मंगल04:5806:06रात
सूर्य06:0607:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 जन॰ 2034संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 जन॰ 2034कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2034मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2034कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
18 जन॰ 2034प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 जन॰ 2034माघ अमावस्याअमावस्या
24 जन॰ 2034विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 जन॰ 2034शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 फ़र॰ 2034प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 फ़र॰ 2034माघ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3322° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।