17 अक्टूबर 2036 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2036, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2036 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (22:19 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (04:04, 18 अक्टू॰ तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:23 पर और सूर्यास्त 17:49 पर है। राहुकाल 10:40 से 12:06 तक है।

दिन और रात
दिन 06:23 – 17:49
रात 06:23 तक
तिथि
त्रयोदशी, 22:19 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 04:04 तक
हस्त
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 अक्टूबर 2036 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 22:19 तक
कृष्ण चतुर्दशी 19:42, 18 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 04:04, 18 अक्टू॰ तक
हस्त 02:15, 19 अक्टू॰ तक
योग
ब्रह्म 16:33 तक
इंद्र 13:13, 18 अक्टू॰ तक
करण
गर 11:40 तक
वणिज 22:19 तक
विष्टि (भद्रा) 08:59, 18 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 11:31 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:23
सूर्यास्त
17:49
चंद्रोदय
03:49
चंद्रास्त
16:39
दिनमान
11h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2093
शक संवत
1958, नल संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:33
अभिजीत मुहूर्त
11:43 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
10:40 – 12:06
यमगंड
14:57 – 16:23
गुलिक काल
07:49 – 09:14

17 अक्टूबर 2036 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:23 – 07:49सामान्य
लाभ07:49 – 09:14शुभ
अमृत09:14 – 10:40शुभ
काल10:40 – 12:06टालें
शुभ12:06 – 13:31शुभ
रोग13:31 – 14:57टालें
उद्वेग14:57 – 16:23टालें
चर16:23 – 17:49सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:49 – 19:23टालें
काल19:23 – 20:57टालें
लाभ20:57 – 22:32शुभ
उद्वेग22:32 – 00:06टालें
शुभ00:06 – 01:40शुभ
अमृत01:40 – 03:15शुभ
चर03:15 – 04:49सामान्य
रोग04:49 – 06:23टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:2307:20दिन
बुध07:2008:17दिन
चंद्र08:1709:14दिन
शनि09:1410:11दिन
गुरु10:1111:09दिन
मंगल11:0912:06दिन
सूर्य12:0613:03दिन
शुक्र13:0314:00दिन
बुध14:0014:57दिन
चंद्र14:5715:54दिन
शनि15:5416:51दिन
गुरु16:5117:49दिन
मंगल17:4918:52रात
सूर्य18:5219:54रात
शुक्र19:5420:57रात
बुध20:5722:00रात
चंद्र22:0023:03रात
शनि23:0300:06रात
गुरु00:0601:09रात
मंगल01:0902:12रात
सूर्य02:1203:15रात
शुक्र03:1504:18रात
बुध04:1805:21रात
चंद्र05:2106:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अक्टू॰ 2036प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2036तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2036कार्तिक अमावस्याअमावस्या
23 अक्टू॰ 2036विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2036शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 नव॰ 2036प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 नव॰ 2036कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
7 नव॰ 2036संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 नव॰ 2036कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 नव॰ 2036कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3710° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।