27 अक्टूबर 2036 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 27 अक्टूबर 2036, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 27 अक्टूबर 2036 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (20:01 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (07:03 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:29 पर और सूर्यास्त 17:39 पर है। राहुकाल 07:53 से 09:17 तक है।

दिन और रात
दिन 06:29 – 17:39
रात 06:30 तक
तिथि
अष्टमी, 20:01 तक
नवमी
नक्षत्र
श्रवण
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 अक्टूबर 2036 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 20:01 तक
शुक्ल नवमी 22:42, 28 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 10:09, 28 अक्टू॰ तक
योग
शूलअशुभ 02:04, 28 अक्टू॰ तक
गंडअशुभ 03:04, 29 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 06:43 तक
बव 20:01 तक
बालव 09:22, 28 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:29
सूर्यास्त
17:39
चंद्रोदय
13:15
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
11h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2093
शक संवत
1958, नल संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:47 – 05:38
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
07:53 – 09:17
यमगंड
10:41 – 12:04
गुलिक काल
13:28 – 14:52

27 अक्टूबर 2036 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:29 – 07:53शुभ
काल07:53 – 09:17टालें
शुभ09:17 – 10:41शुभ
रोग10:41 – 12:04टालें
उद्वेग12:04 – 13:28टालें
चर13:28 – 14:52सामान्य
लाभ14:52 – 16:16शुभ
अमृत16:16 – 17:39शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:39 – 19:16सामान्य
रोग19:16 – 20:52टालें
काल20:52 – 22:28टालें
लाभ22:28 – 00:05शुभ
उद्वेग00:05 – 01:41टालें
शुभ01:41 – 03:17शुभ
अमृत03:17 – 04:54शुभ
चर04:54 – 06:30सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:2907:25दिन
शनि07:2508:21दिन
गुरु08:2109:17दिन
मंगल09:1710:13दिन
सूर्य10:1311:08दिन
शुक्र11:0812:04दिन
बुध12:0413:00दिन
चंद्र13:0013:56दिन
शनि13:5614:52दिन
गुरु14:5215:48दिन
मंगल15:4816:43दिन
सूर्य16:4317:39दिन
शुक्र17:3918:44रात
बुध18:4419:48रात
चंद्र19:4820:52रात
शनि20:5221:56रात
गुरु21:5623:00रात
मंगल23:0000:05रात
सूर्य00:0501:09रात
शुक्र01:0902:13रात
बुध02:1303:17रात
चंद्र03:1704:22रात
शनि04:2205:26रात
गुरु05:2606:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 अक्टू॰ 2036शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 नव॰ 2036प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 नव॰ 2036कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
7 नव॰ 2036संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 नव॰ 2036कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 नव॰ 2036कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2036प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2036वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2036मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
21 नव॰ 2036विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3714° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।