24 नवंबर 2036 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 24 नवंबर 2036, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 24 नवंबर 2036 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (11:55 तक), नक्षत्र श्रवण (18:19 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:51 पर और सूर्यास्त 17:24 पर है। राहुकाल 08:10 से 09:29 तक है।

दिन और रात
दिन 06:51 – 17:24
रात 06:51 तक
तिथि
षष्ठी, 11:55 तक
सप्तमी
नक्षत्र
श्रवण, 18:19 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 नवंबर 2036 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 11:55 तक
शुक्ल सप्तमी 14:37, 25 नव॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 18:19 तक
धनिष्ठा 21:27, 25 नव॰ तक
योग
वृद्धि 08:44 तक
ध्रुव 09:42, 25 नव॰ तक
करण
तैतिल 11:55 तक
गर 01:15, 25 नव॰ तक
वणिज 14:37, 25 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:51
सूर्यास्त
17:24
चंद्रोदय
11:52
चंद्रास्त
22:59
दिनमान
10h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2093
शक संवत
1958, नल संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:03 – 05:57
अभिजीत मुहूर्त
11:46 – 12:28

अशुभ समय

राहुकाल
08:10 – 09:29
यमगंड
10:48 – 12:07
गुलिक काल
13:26 – 14:46

24 नवंबर 2036 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:51 – 08:10शुभ
काल08:10 – 09:29टालें
शुभ09:29 – 10:48शुभ
रोग10:48 – 12:07टालें
उद्वेग12:07 – 13:26टालें
चर13:26 – 14:46सामान्य
लाभ14:46 – 16:05शुभ
अमृत16:05 – 17:24शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:24 – 19:05सामान्य
रोग19:05 – 20:46टालें
काल20:46 – 22:27टालें
लाभ22:27 – 00:08शुभ
उद्वेग00:08 – 01:49टालें
शुभ01:49 – 03:30शुभ
अमृत03:30 – 05:10शुभ
चर05:10 – 06:51सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5107:43दिन
शनि07:4308:36दिन
गुरु08:3609:29दिन
मंगल09:2910:22दिन
सूर्य10:2211:15दिन
शुक्र11:1512:07दिन
बुध12:0713:00दिन
चंद्र13:0013:53दिन
शनि13:5314:46दिन
गुरु14:4615:38दिन
मंगल15:3816:31दिन
सूर्य16:3117:24दिन
शुक्र17:2418:31रात
बुध18:3119:39रात
चंद्र19:3920:46रात
शनि20:4621:53रात
गुरु21:5323:00रात
मंगल23:0000:08रात
सूर्य00:0801:15रात
शुक्र01:1502:22रात
बुध02:2203:30रात
चंद्र03:3004:37रात
शनि04:3705:44रात
गुरु05:4406:51रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 नव॰ 2036शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 दिस॰ 2036प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 दिस॰ 2036मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
7 दिस॰ 2036संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 दिस॰ 2036कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 दिस॰ 2036कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 दिस॰ 2036प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 दिस॰ 2036धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2036पौष अमावस्याअमावस्या
21 दिस॰ 2036विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3725° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।