9 अगस्त 2037 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 9 अगस्त 2037, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 9 अगस्त 2037 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (22:07 तक), नक्षत्र आर्द्रा (06:50 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:47 पर और सूर्यास्त 19:05 पर है। राहुकाल 17:25 से 19:05 तक है।

दिन और रात
दिन 05:47 – 19:05
रात 05:47 तक
तिथि
त्रयोदशी, 22:07 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 05:14 तक
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अगस्त 2037 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 22:07 तक
कृष्ण चतुर्दशी 19:21, 10 अग॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 05:14, 10 अग॰ तक
पुष्य 03:07, 11 अग॰ तक
योग
वज्रअशुभ 18:48 तक
सिद्धि 15:33, 10 अग॰ तक
करण
गर 11:17 तक
वणिज 22:07 तक
विष्टि (भद्रा) 08:48, 10 अग॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 23:41 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:47
सूर्यास्त
19:05
चंद्रोदय
03:14
चंद्रास्त
17:24
दिनमान
13h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2094
शक संवत
1959, पिंगल संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:21 – 05:04
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
17:25 – 19:05
यमगंड
12:26 – 14:06
गुलिक काल
15:46 – 17:25

9 अगस्त 2037 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:47 – 07:27टालें
चर07:27 – 09:06सामान्य
लाभ09:06 – 10:46शुभ
अमृत10:46 – 12:26शुभ
काल12:26 – 14:06टालें
शुभ14:06 – 15:46शुभ
रोग15:46 – 17:25टालें
उद्वेग17:25 – 19:05टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:05 – 20:26शुभ
अमृत20:26 – 21:46शुभ
चर21:46 – 23:06सामान्य
रोग23:06 – 00:26टालें
काल00:26 – 01:47टालें
लाभ01:47 – 03:07शुभ
उद्वेग03:07 – 04:27टालें
शुभ04:27 – 05:47शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4706:53दिन
शुक्र06:5308:00दिन
बुध08:0009:06दिन
चंद्र09:0610:13दिन
शनि10:1311:19दिन
गुरु11:1912:26दिन
मंगल12:2613:33दिन
सूर्य13:3314:39दिन
शुक्र14:3915:46दिन
बुध15:4616:52दिन
चंद्र16:5217:59दिन
शनि17:5919:05दिन
गुरु19:0519:59रात
मंगल19:5920:52रात
सूर्य20:5221:46रात
शुक्र21:4622:39रात
बुध22:3923:33रात
चंद्र23:3300:26रात
शनि00:2601:20रात
गुरु01:2002:13रात
मंगल02:1303:07रात
सूर्य03:0704:00रात
शुक्र04:0004:54रात
बुध04:5405:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 अग॰ 2037प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 अग॰ 2037श्रावण अमावस्याअमावस्या
14 अग॰ 2037विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2037सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2037शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 अग॰ 2037प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 अग॰ 2037श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
30 अग॰ 2037संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 सित॰ 2037कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 सित॰ 2037कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3824° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।