10 दिसंबर 2038 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 10 दिसंबर 2038, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 10 दिसंबर 2038 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (20:43 तक), नक्षत्र कृत्तिका (16:11 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 07:02 पर और सूर्यास्त 17:24 पर है। राहुकाल 10:56 से 12:13 तक है।

दिन और रात
दिन 07:02 – 17:24
रात 07:03 तक
तिथि
चतुर्दशी, 20:43 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
कृत्तिका, 16:11 तक
रोहिणी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 दिसंबर 2038 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 20:43 तक
पूर्णिमा 23:00, 11 दिस॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 18:56, 11 दिस॰ तक
योग
सिद्ध 03:11, 11 दिस॰ तक
साध्य 03:47, 12 दिस॰ तक
करण
गर 07:29 तक
वणिज 20:43 तक
विष्टि (भद्रा) 09:53, 11 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:02
सूर्यास्त
17:24
चंद्रोदय
16:34
चंद्रास्त
05:34
दिनमान
10h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2095
शक संवत
1960, कालयुक्त संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:13 – 06:08
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:34

अशुभ समय

राहुकाल
10:56 – 12:13
यमगंड
14:49 – 16:07
गुलिक काल
08:20 – 09:38

10 दिसंबर 2038 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:02 – 08:20सामान्य
लाभ08:20 – 09:38शुभ
अमृत09:38 – 10:56शुभ
काल10:56 – 12:13टालें
शुभ12:13 – 13:31शुभ
रोग13:31 – 14:49टालें
उद्वेग14:49 – 16:07टालें
चर16:07 – 17:24सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:24 – 19:07टालें
काल19:07 – 20:49टालें
लाभ20:49 – 22:31शुभ
उद्वेग22:31 – 00:14टालें
शुभ00:14 – 01:56शुभ
अमृत01:56 – 03:38शुभ
चर03:38 – 05:21सामान्य
रोग05:21 – 07:03टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:0207:54दिन
बुध07:5408:46दिन
चंद्र08:4609:38दिन
शनि09:3810:30दिन
गुरु10:3011:21दिन
मंगल11:2112:13दिन
सूर्य12:1313:05दिन
शुक्र13:0513:57दिन
बुध13:5714:49दिन
चंद्र14:4915:41दिन
शनि15:4116:32दिन
गुरु16:3217:24दिन
मंगल17:2418:33रात
सूर्य18:3319:41रात
शुक्र19:4120:49रात
बुध20:4921:57रात
चंद्र21:5723:05रात
शनि23:0500:14रात
गुरु00:1401:22रात
मंगल01:2202:30रात
सूर्य02:3003:38रात
शुक्र03:3804:47रात
बुध04:4705:55रात
चंद्र05:5507:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 दिस॰ 2038मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
15 दिस॰ 2038संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 दिस॰ 2038धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
19 दिस॰ 2038कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
22 दिस॰ 2038कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 दिस॰ 2038प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 दिस॰ 2038पौष अमावस्याअमावस्या
29 दिस॰ 2038विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 जन॰ 2039शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 जन॰ 2039प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4010° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।