6 मार्च 2040 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 6 मार्च 2040, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 6 मार्च 2040 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (23:50 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (02:37, 7 मार्च तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:40 पर और सूर्यास्त 18:24 पर है। राहुकाल 15:28 से 16:56 तक है।

दिन और रात
दिन 06:40 – 18:24
रात 06:39 तक
तिथि
अष्टमी, 23:50 तक
नवमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 02:37 तक
मूल
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 मार्च 2040 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 23:50 तक
कृष्ण नवमी 21:43, 7 मार्च तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 02:37, 7 मार्च तक
मूल 01:10, 8 मार्च तक
योग
वज्रअशुभ 22:39 तक
सिद्धि 19:46, 7 मार्च तक
करण
बालव 12:48 तक
कौलव 23:50 तक
तैतिल 10:49, 7 मार्च तक
चंद्र राशि
वृश्चिक 02:37, 7 मार्च तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:40
सूर्यास्त
18:24
चंद्रोदय
00:46
चंद्रास्त
11:24
दिनमान
11h 44m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2096
शक संवत
1961, सिद्धार्थी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:02 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
12:09 – 12:55

अशुभ समय

राहुकाल
15:28 – 16:56
यमगंड
09:36 – 11:04
गुलिक काल
12:32 – 14:00

6 मार्च 2040 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:40 – 08:08टालें
उद्वेग08:08 – 09:36टालें
चर09:36 – 11:04सामान्य
लाभ11:04 – 12:32शुभ
अमृत12:32 – 14:00शुभ
काल14:00 – 15:28टालें
शुभ15:28 – 16:56शुभ
रोग16:56 – 18:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:24 – 19:56टालें
लाभ19:56 – 21:28शुभ
उद्वेग21:28 – 23:00टालें
शुभ23:00 – 00:31शुभ
अमृत00:31 – 02:03शुभ
चर02:03 – 03:35सामान्य
रोग03:35 – 05:07टालें
काल05:07 – 06:39टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:4007:39दिन
सूर्य07:3908:37दिन
शुक्र08:3709:36दिन
बुध09:3610:35दिन
चंद्र10:3511:33दिन
शनि11:3312:32दिन
गुरु12:3213:31दिन
मंगल13:3114:29दिन
सूर्य14:2915:28दिन
शुक्र15:2816:27दिन
बुध16:2717:25दिन
चंद्र17:2518:24दिन
शनि18:2419:25रात
गुरु19:2520:26रात
मंगल20:2621:28रात
सूर्य21:2822:29रात
शुक्र22:2923:30रात
बुध23:3000:31रात
चंद्र00:3101:33रात
शनि01:3302:34रात
गुरु02:3403:35रात
मंगल03:3504:36रात
सूर्य04:3605:38रात
शुक्र05:3806:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 मार्च 2040कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 मार्च 2040कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 मार्च 2040प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 मार्च 2040फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
14 मार्च 2040मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
16 मार्च 2040विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
24 मार्च 2040शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 मार्च 2040प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 मार्च 2040फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
1 अप्रैल 2040संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4183° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।